Friday, August 24, 2018

Grammar mass communication व्याकरण जनसंचार की विधाएं

विद्यार्थियों

जनसंचार को समझने के लिए संचार के स्वरूप को समझना बहुत जरूरी है |

प्रश्न -  संचार क्या है?
उत्तर -
मनुष्य सामाजिक प्राणी है सामाजिक प्राणी होने के कारण वह संचार करता है | संचार का मतलब
विचरण करना | दैनिक जीवन में संचार के बिना हम जीवित नहीं रह सकते | क्योंकि मनुष्य जब
तक जीवित है | संचार अर्थात विचरण करता रहेगा | हम यह भी कह सकते हैं कि समाचार जीवन
की निशानी है | हम जिस संचार की बात कर रहे हैं | उसका अर्थ है मानव के संदेशों को पहुंचाना
अर्थात संदेश भेजना प्राप्त करना इसके दो अनिवार्य लक्षण है |
1. दो या दो से अधिक व्यक्ति
2. उनके बीच किसी संदेश का ग्रहण होना या संप्रेषण होना |
संचार जो है अनुभवों की साझेदारी है | संचार की परिभाषा इस प्रकार हम कह सकते हैं | सूचनाओं
विचारों और भावनाओं को लिखित, मौखिक या दृश्य- श्रव्य माध्यमों के जरिए सफलतापूर्वक एक
जगह से दूसरी जगह पहुंचाना ही संचार है |

प्रश्न - संचार के साधन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर -
वह साधन हमारे संदेश को पहुंचाते हैं  जैसे समाचार पत्र, फिल्म, टेलीफोन रेडियो, दूरदर्शन,
इंटरनेट, सिनेमा और फक्स आदि |


प्रश्न - संचार की प्रक्रिया के तत्व कौन कौन से हैं ?
उत्तर -
संचार की प्रक्रिया के निम्नलिखित तत्व है |
- संचारक या स्त्रोत
- संदेश का कुटीकरण
- संदेश का  कूटवाचन
- प्राप्तकर्ता

प्रश्न - संचार के विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डालिए ?
उत्तर -
संचार के निम्न प्रकार है |
- सांकेतिक संचार
- मौखिक संचार
- समूह संचार
- अंत: र्वैयक्तिक  संचार
- जनसंचार

प्रश्न - फीडबैक से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर -
कुट्टी कृत संदेश के पहुंचने पर प्राप्तकर्ता अपनी प्रतिक्रिया करता है |
इससे पता चलता कि संचारक का संदेश प्राप्त करता तक पहुंच गया |

प्रश्न - एनकोडिंग या कुटीकरण का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर -
संदेश को भेजने के लिए शब्दों संकेतों या ध्वनि चित्रों का उपयोग किया जाता है | भाषा भी
एक प्रकार का कोट चिन्ह या कोड  होता है | अतः प्राप्तकर्ता को समझाने योग्य कुटों में
संदेश को बांधना एनकोडिंग या कुटीकरण कहलाता है |

प्रश्न - कूट वाचन या डिकोडिंग से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर -
कुटीकरण की उल्टी प्रक्रिया कूट वाचन कहलाती है | इसके माध्यम से संदेश को प्राप्त करता
कूट चिन्हों में बंधे संदेश समझाता है | इसके लिए आवश्यक है कि प्राप्तकर्ता भी कोड का
वही अर्थ समझता हूं | जो उसे संचारक समझाना चाहता है |

प्रश्न - सांकेतिक संचार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर - सांकेतिक संचार का आर्थिक संकेतों द्वारा संदेश पहुंचाना | मनुष्य का हाथजोड़ना, पांव
छूना, हाथ मिलाना, मुट्ठी कसना, सिग्नल देना, लाल बत्ती होना, हरी बत्ती होना आदि सांकेतिक
संचार है |

प्रश्न - समूह संचार का क्या आशय है?
उत्तर -
एक से अधिक व्यक्तियों से बात करता है  | किसी समूह के सदस्य आपस में विचार विमर्श करते हैं
तो उसे समूह संचार कहते हैं | अध्यापक का कक्षा में पढ़ाना किसी संस्था की बैठक होना, जलसा
या जुलूस  मैं वार्तालाप कोई एक व्यक्ति बात करता है और वह सबके लिए करता है | वह सामूहिक
मुद्दों पर की गई वार्ता समूह संचार के अंतर्गत ही आती है |

प्रश्न - जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर -
जनसंचार नहीं सभ्यता का शब्द है जब संचार किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज
के विशाल वर्ग से संवाद करने की कोशिश की जाती है तो उसे जनसंचार कहते हैं | इसमें एक संदेश
को यांत्रिक माध्यम के जरिए बहुगुणित किया जाता है | ताकि उसे अधिक से अधिक लोगों तक
पहुंचाया जा सके |

जनसंचार की प्रमुख विशेषताएं -
- जनसंचार माध्यमों के जरिए प्रकाशित या  प्रसारित संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है |
- इसमें संचालक और प्राप्तकर्ता के बीच प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता |
- इस माध्यम में अनेक द्वार पाल होते हैं जो इन माध्यमों  से प्रकाशित /प्रसारित होने वाली सामग्री
को नियंत्रण तथा निर्धारित करते हैं |

प्रश्न - जनसंचार माध्यमों में द्वारपालों की भूमिका क्या है ?
उत्तर -
जनसंचार  माध्यमिक में द्वारपालों की भूमिका महत्वपूर्ण है | यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह
सार्वजनिक हित, पत्रकारिता के सिद्धांतों, मूल्यों और आचार संहिता के अनुसार सामग्री को संपादित
करें तथा इसके बाद ही उनके प्रसारण या प्रकाशन को इजाजत दे |

प्रश्न - जनसंचार के कौन-कौन से कार्य हैं स्पष्ट करें?
उत्तर -
जनसंचार के निम्नलिखित कार्य हैं  |
1. सूचना देना - जनसंचार माध्यमों का प्रमुख कार्य सूचना देना है यह दुनिया भर से सूचनाएं
प्रसारित करते हैं |
2. मनोरंजन - जनसंचार माध्यम सिनेमा रेडियो-टीवी आदि मनोरंजन के भी प्रमुख साधन है |
3. जागरूकता - यह जनता को शिक्षित करते हैं जनसंचार माध्यम लोगों को जागरूक बनाते हैं |
4. निगरानी - जनसंचार माध्यम सरकार और संस्थाओं के कामकाज पर निगरानी भी रखते हैं |
5. विचार विमर्श के मंच - यह माध्यम लोकतंत्र में विभिन्न विचारों की अभिव्यक्ति का मंच
उपलब्ध कराते हैं इसके जरिए विभिन्न विचार लोगों के सामने पहुँचाते हैं |

प्रश्न - जनसंचार के माध्यमों को आम जीवन पर क्या प्रभाव है ?
उत्तर -
जनसंचार माध्यमों का आम जीवन पर बहुत प्रभाव है इनसे सेहत, अध्यात्मक, दैनिक जीवन
की जरूरतें हैं आदि पूरी होने लगी है | यह हमारी जीवनशैली को प्रभावित कर रहे हैं |

प्रश्न - लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों का प्रभाव बताइए ?
उत्तर -
लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों में जीवन को गतिशील व पारदर्शी बनाया है | इससे माध्यम में
विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श व  बहस होती है | सूचनाओं में जानकारियों का आदान प्रदान
होता है | जो सरकार की कार्यशैली पर अंकुश रखती है | लोकतंत्र को सशक्त बनाती है |

प्रश्न - जनसंचार के दुष्प्रभाव बताइए?
उत्तर -
1. जनसंचार के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को कम महत्व दिया जाता है |
2.  समाज में अश्लीलता व सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देते हैं |
3.  जनसंचार के माध्यम खास तौर पर TV वेब सिनेमा ने लोगों को काल्पनिक दुनिया की
सैर कराई है | यह आम जनजीवन से दूर हो जाते हैं | यह पलायनवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं |
4. अनावश्यक मुद्दों को उछाला जाता है |
5. कई बार बहुत छोटी बात को बहुत बढ़ा चढ़ाकर बताया जाता है |


शुभकामनाएं सहित !

नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |

Saturday, August 4, 2018

Grammar report writing व्याकरण रिपोर्ट / प्रतिवेदन

विद्यार्थियों

आज हम हिंदी व्याकरण - रिपोर्ट / प्रतिवेदन करेंगे |

रिपोर्ट शब्द अंग्रेजी से हिंदी में लिया गया है | यह पत्रकारिता से संबंधित है रिपोर्ट शब्द का अर्थ
है | घटना की ठीक-ठीक सूचना सूचना देने या संवाद भेजने के कार्य को रिपोर्टिंग भी कहा जाता है |

प्रतिवेदन को अंग्रेजी में रिपोर्ट या रिपोर्टिंग कहते हैं | यह एक प्रकार का लिखित विवरण होता है |
जिसमें किसी संस्था सभा वन विभाग या विशेष आयोजन की तथ्यात्मक जानकारी दी जाती है |
प्रतिवेदन कई प्रकार के होते हैं | अर्थात इन्हें कई श्रेणियों में बांटा जा सकता है -
- सभा, गोष्ठी या किसी सम्मेलन का प्रतिवेदन
- संस्था का वार्षिक / मासिक प्रतिवेदन
- व्यवसाय की प्रगति या स्थिति का प्रतिवेदन
- जांच समिति द्वारा प्रतिवेदन

प्रतिवेदन अर्थात रिपोर्ट लेखन के तत्व :
1. तथ्यपरकता : रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित होती है यह किसीछोटी  घटना पर भी हो सकती है
या बड़ी घटना पर भी |  जब तक रिपोर्टर तथ्यों को पाठकों के सामने नहीं लगता वह रिपोर्ट नहीं
होती | इस में आंकड़ों तथा तथ्यों की जरूरत होती है |

2. प्रत्यक्ष अनुभव : रिपोर्ट लेखन प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित होता है| रिपोर्टर घटनास्थल पर
पहुंच कर घटना का जायजा लेता है | वह तथ्य एकत्रित करता है | तथा आसपास के माहौल की
जांच करता है | प्रत्यक्ष अनुभव के बिना रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकती |

3. संक्षिप्तता : रिपोर्ट में संक्षिप्तता का गुण आवश्यक है यदि किसी घटना का विवरण बढ़ा
चढ़ाकर किया जाता है तो वह निराश हो जाती है | पाठक को सिर्फ वोट को पड़ता है | जिसमें
कम शपथ और अधिक जानकारी हो बड़ी रिपोर्ट जो उबाऊ हो जाती है |

4. रोचकता क्रमबद्धता : रिपोर्ट में रोचकता और क्रमबद्धता जरूरी है यदि घटना को सिलसिलेवार
वर्णन प्रस्तुत किया जाए सुविचारों की तारतम्यता टूटती है | इससे तथ्य  गड़बड़हो जाते हैं |
इसके अतिरिक्त रिपोर्ट में रोचकता होनी चाहिए | रिपोर्ट की शैली रोचक होनी चाहिए |

रिपोर्ट के गुण :
- रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट और पूर्ण होनी चाहिए |
- भाषा में अलंकार और मुहावरेदार नहीं होनी चाहिए| किसी भी वाक्य का एक से अधिक अर्थ
नहीं निकलना चाहिए |
- केवल महत्वपूर्ण तथ्यों का समावेश होना चाहिए |
- प्रतिवेदन का एक शीर्षक भी होना चाहिए |
- सभी तथ्य सत्य प्रमाणित और विश्वसनीय होने चाहिए |
- प्रतिवेदन के अंत पर अर्थात रिपोर्ट के अंतर पर सभा दल संस्था के अध्यक्ष के हस्ताक्षर भी
होने चाहिए |

रिपोर्ट के 2 उदाहरण देखिए :

1. बस स्टैंड पर हुए बम विस्फोट के आप प्रत्यक्षदर्शी हैं इसकी एक रिपोर्ट तैयार कीजिए |
                           बस स्टैंड में बम विस्फोट
आज 5 अगस्त को प्रातः सुबह 8:00 बजे भीड़-भाड़ से भरे अति व्यस्त बस स्टैंड में बम विस्फोट
हुआ | विस्फोट का जोरदार धमाका दूर दूर तक सुनाई दिया | उसके कारण उत्पन्न काला धुआं
आकाश में देर तक छाया रहा | इससे 4 लोग घायल हो गए लेकिन किसी के जीवन की क्षति
नहीं हुई विस्फोट के कारण कुछ खिड़कियों के शीशे टूट गए | उपस्थित सभी लोगों में भगदड़ मच
गई और उससे हल्की चोटें भी आई पुलिस ने तत्काल विस्फोट स्थल को घेर लिया | वह कारणों
की जानकारी प्राप्त कर रही है | विस्फोटक साइकिल के पीछे रखे थैले में विस्फोटक सामग्री के
कारण हुआ | इस फोटो के पीछे आंतकवादियों का हाथ हो सकता है |  

2.
                    सिलेंडर बदलने के दिन खत्म, सीधे रसोई में पहुंचेगी गैस पाइप
अमेरिका जापान और ब्रिटेन जैसे विकसित राष्ट्रों को छोड़ दीजिए | पाकिस्तान तक की गृहिणियां
कम से कम एक मामले में भारतीय गृहिणियों के सामने इतरा सकती हैं | उक्त देशों सहित विश्व
के अधिकांश विकसित और विकासशील देशों में अब पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस सीधे
रसोईघर पहुंचाई जा  रही हैं | अब भारत सरकार ने भी भारतीयों  गृहिणियों को सिलेंडर बदलने
के झंझट से मुक्ति देने के लिए सीधा रसोई घर तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय नीति लागू करने
का फैसला किया है | पहले चरण में लगभग दो दर्जन शहरों में लागू किया जाएगा| उनमें उत्तर
प्रदेश के भी पांच शहर है लखनऊ,  कानपुर, बरेली, आगरा, नोएडा |


इसके अलावा महाराष्ट्र  के मुंबई के आसपास के शहर में नवी मुंबई | गुजरात में सूरत,
अहमदाबाद, बड़ौदा को शामिल  किया जा सकता जा रहा है | कीमत निर्धारण पेट्रोलियम
नियामक बोर्ड ही करेगा | योग्यता के आधार पर प्रवेश की अनुमति मिलेगी | बहुत संभव है कि
जिस तरह से आधारित सिटी परिवहन व्यवस्था लागू की जा रही है उसी तर्ज पर घरों तक रसोई
गैस पहुंचाने की  भी व्यवस्था की जाए | इस समय दिल्ली और उसके आसपास के कुछ इलाकों
में इस तरह की योजना लागू की गई है | लेकिन पहली बार सरकार इस बारे में एक नीति बनाकर
आगे का रास्ता खोलना चाहती हैं | पहले चरण की सफलता के बाद इसे धीरे-धीरे पूरे देश में लागू
किया जाएगा | सबसे पहले तो उन्हें सिलेंडर में गैस का सिर दर्द खत्म होगा बेवक्त बेवक्त गैस
खत्म होने की टेंशन भी नहीं रहेगी |


शुभकामनाएं सहित !

नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |

Wednesday, August 1, 2018

Grammar Letter writing व्याकरण पत्र लेखन

विद्यार्थियों

आज हम हिंदी व्याकरण - पत्र लेखन करेंगे |


पत्र दो प्रकार के होते हैं - अनौपचारिक पत्र और औपचारिक पत्र |

_________________________________________________________

अनौपचारिक पत्रों में पारिवारिक पत्र आते हैं और सामाजिक पत्र आते हैं | औपचारिक पत्रों
में कार्यालय पत्र और व्यापारिक पत्र आते हैं | पारिवारिक पत्र में निजीपन और आत्मीयता
वैशिष्ट्य रहती है | माता, पिता, पुत्र, पुत्री  में व अन्य परिवारजनों और संबंधियों को लिखे जाने
वाले पत्र पारिवारिक पत्र कहलाते हैं | इन्हें व्यक्तिगत और घरेलू पत्र भी कह सकते हैं |

लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
- सर्वप्रथम अंतर्देशीय ,पोस्टकार्ड यi सादे कागज के बाएं और शीर्ष पर पत्र लिखने वाले का
पता और भेजने की तिथि लिखी जाती है |
- बाई और संबोधन शब्द लिखा जाता है और संबोधन शब्द के बाद अल्पविराम लगाया
जाता है |

अभिवादन :
- सूचक शब्द लिखा जाता है उसके बाद पूर्ण विराम लगाया जाता है |
- अभिवादन सूचक शब्द के पूर्ण विराम के पश्चात उसी पंक्ति में पत्र का मुख्य विषय आरंभ
होता है |

समाप्ति :
- मुख्य विषय की समाप्ति पर आशा है आप स्वस्थ होंगे, आनंद मंगल होंगे, कुशल मंगल
होंगे, पत्र की प्रतीक्षा में आदि समापन वाक्यों का प्रयोग होता है |
- पत्र के अंत में बाई और समापन सूचक शब्द भवदीय, सद्भावी, आपका अपना आदि के
साथ अल्पविराम लगाकर नीचे पत्र के हस्ताक्षर के नाम को लिखा जा |

उदाहरण के लिए पारिवारिक पत्र - अपने छोटे भाई को समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते
हुए पत्र लिखिए |

परीक्षा भवन
क ख ग
10 सितंबर 2018

प्रिय भाई !

शुभ आशीर्वाद |
कल ही पिताजी का पत्र प्राप्त हुआ यह जानकर बहुत कष्ट हुआ कि तुम अर्धवार्षिक परीक्षा
में तीन विषयों में फेल हो गए हो और यह भी ज्ञात हुआ कि आप अपना अधिकतर समय मित्रों
के साथ मौज मस्ती में व्यतीत करते हो और जिसका असर तुम्हारी पढ़ाई पर पढ़ रहा है |
प्रिय भाई इस संसार में सबसे अमूल्य वस्तु समय है समय का आदर करने वाला व्यक्ति ही
सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचता है और जो समय को नहीं पहचानता वह दर-दर की ठोकरें
खाता है | बीता हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता |

इस समय तुम आप जिन कक्षा में पढ़ रहे हो यह तुम्हारे जीवन और भविष्य का एक निर्णायक
मोड़ है | या तो तुम  सही दिशा में चले जाओगे या असफल होकर गुमनामी के अंधेरे में खो
जाओगे | तुम्हारे कंधों पर अपना भविष्य बनाने की जिम्मेदारी नहीं हम सब के सपनों का भारी
बोझ भी है | तुम्हें अपने लिए और हम सबके लिए समय के महत्व को पहचानना ही होगा आशा
है | तुम अपनी बहन की बातों को गंभीरता से समझोगे और समय के महत्व को वार्षिक परीक्षा
आने से पहले परिश्रम में जुड़ जाओगे | मैं तुम्हारे सामर्थ्यऔर दृढ़ निश्चय के बारे में भी खूब
जानती हूं | जरूरत है तो बस समय का सदुपयोग करने की आशा है आप हमें निराश नहीं
करोगे |

शुभकामनाओं सहित |

तुम्हारी बहन,
ममता

_________________________________________________________

सामाजिक पत्र - सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य अपने समाज का एक अभिन्न अंग
होता है |

लेखन हेतु जरूरी निर्देश :
घर परिवार से बाहर वह अपने पड़ोसियों मित्रों सहयोगियो, परिचितों, हितैषियों और
दूसरे स्थान पर सु ह्रदय से सामाजिक संबंधों से जुड़ा रहता है | विविध संस्कारों, लोका चारों,
अनुष्ठानों आदि के अवसर पर सुख- दुख एवं हर्ष विषाद की सूचना अपने सगे - संबंधियों
आदि को देने के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं | वह सामाजिक पत्र कहलाते हैं | अवसर और
प्रसंगानुसार के कई प्रकार के होते हैं |

प्रारंभ :
निमंत्रण पत्र, बधाई पत्र, शोक पत्र आदि समाजिक पत्रों का प्रारंभ हम आदरणीय, मान्यवर,
प्रिय, महोदय आदि संबोधन से होता है |

समाप्ति :
अंत में अपने विनीत, भवदीय, तुम्हारा शुभचिंतक, कुछ भी लिख सकते हैं |

उदाहरण के लिए सामाजिक पत्र - अपने मित्र को वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम आने पर बधाई
पत्र लिखिए |

परीक्षा भवन
क ख ग
10 सितंबर 2018

प्रिय अतुल,

सस्नेह नमस्कार |

अभी अभी तुम्हारा पत्र मिला, पढ़ कर प्रसन्नता हुई कि तुमने राज्य स्तरीय वाद विवाद
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है | मधुर यह बहुत बड़ी उपलब्धि है |

ऐसी प्रतियोगिताओं के प्रति तुम्हारे रुझान में से मैं  परिचित हूं तुम्हारा शुद्ध उच्चारण, ओजस्वी
वाणी ,शानदार प्रस्तुति मिलकर ही ऐसे कमाल करते हैं | जिला स्तरीय प्रतियोगिता में तो
तुमने कई बार जीती हैं | लेकिन राज्य स्तरीय उपलब्धि तुम ने पहली बार प्राप्त की है मेरी
और मेरे परिवार की हार्दिक बधाई स्वीकार करो | हम सभी तुम्हारी इस खुशी में शामिल है
और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं | ईश्वर से प्रार्थना कि तुम सफलता के शिखर पर पहुंचे
पढ़ाई के साथ-साथ तुम्हारी यह कला तुम्हें भविष्य में ऊंचा मुकाम दिलाएगी | तुम्हारा स्वप्न
रहा है | एक नामी वकील बनने का ऐसी उपलब्धियां तो तुम्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के
लिए सबल देंगी |

चाचा चाची जी को हम सब की ओर से शत-शत बधाई हो मिठाई तुमसे मिलने पर खाऊंगा |

तुम्हारा अभिन्न मित्र
सहदेव

__________________________________________________________

कार्यालय पत्र (औपचारिक पत्र)
प्रारंभ :   
- सबसे पहले पत्र प्रेषित करने वाले यानि व्यक्ति या संस्था का नाम व पता रहता है |
- जिससे पत्र पाने वाला पत्र देखते ही समझ जाता कि यह पत्र कहां से आया पत्र प्रेशर के
पास यदि दूरभाष है | तो पति के साथ दूरभाष संख्या भी लिखी रहती है |

पत्र संख्या स्थान और दिनांक :
- इसके पश्चात बाय सर बाय कानों मेंपत्र संख्या भी लिखी जाती है |

प्राप्तकर्ता का नाम पदनाम और पता :
- शीर्ष के नीचे बाईं ओर पत्र के प्राप्तकर्ता का पूरा नाम पद नाम तथा पता अंकित किया
जाता है|

विषय और शीर्षक :
- पत्र प्राप्त करता के पदनाम के नीचे साधारणता संबोधन से पहले कभी कभी बाद में बाई
और विषय लिखकर विराम चिन्ह लगा दिया जाता है |
- संक्षेप में पत्र का विषय निर्देश भी कर दिया जाता है |

संबोधन :
- विषय का उल्लेख किया जाने के पश्चात पत्र में संबोधन के लिए प्राय महोदय / महोदया
शब्द का प्रयोग किया जाता है सरकारी और औपचारिक पत्र में संबोधन के बाद अभिवादन
की विशेषता नहीं पड़ती |

पत्र की मुख्य सामग्री :
- संबोधन के बाद पत्र की मुख्य सामग्री आती है |
- संबोधन के बाद हास्य छोड़कर पत्र की मुख्य सामग्री प्रारंभ की जाती है पत्र की मुख्य
सामग्री सामग्री का उल्लेख करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए |
- दिनांक …………. देखें “या “ आप के पत्र संख्या  ………….. दिनांक ……..
के संदर्भ में मुझे आपको सूचित करने का निर्देश हुआ कि …...….. आदि |
- एक पत्र को एक ही विषय से संबंधित होना चाहिए |
- पत्र में में उपयोग विराम चिन्ह आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए |

पत्र का समापन :
- विनम्र शब्दों में कार्य के शीघ्र यथाशीघ्र किए जाने के विषय में निवेदन किया जाना चाहिए
कि आशा है |
- आप मेरी समस्या पर शहर दया पूर्वक विचार करेंगे और अनु गृहीत करेंगे |
- सधन्यवाद |
- अंत में हस्ताक्षर नाम पता जो भी संलग्न है |

पुनश्च :
- यदि कोई महत्वपूर्ण बात पत्र की मुख्य सामग्री से छूट गई हो या आ ना पाई हो तो उसका
उल्लेख पुणे पुनश्च लिखकर किया जाता है |
- पृष्ठांकन संख्या अधिक उल्लेख कर सकते हैं |

उदाहरण के लिए कार्यालय पत्र - हरियाणा सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव की
ओर से जिला उपायुक्त को पत्र लिखें जिसमें बाढ़ से निपटने के सुझाव |

कृषि मंत्रालय हरियाणा सरकार,
चंडीगढ़ |
पत्र संख्या - हरि (कृषि) ओ. ए. वन. 2018:167
दिनांक - 15  जुलाई 2018

प्रति,
उपायुक्त,
करनाल |

विषय - करनाल जिले में बाढ़ से निपटने के सुझाव |

महोदय,

हरियाणा सरकार की ओर से मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है
कि करनाल जिले में आई बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं |

राष्ट्रीय समाचार पत्र में इस बार के बारे में अनेक समाचार प्रकाशित हुए हैं | इस बात को
लेकर हरियाणा सरकार की आलोचना की गई है कि सरकार की ओर से आवश्यक कदम नहीं
उठाए जा रहे हैं | अतः आप इस दिशा में तत्काल आवश्यक कार्यवाही करें | बाढ़ से प्रभावित
क्षेत्रों में तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाए समाज के पिछड़े और गरीब लोगों से योग की
आवश्यकता वस्तुएं मुफ्त बंटी जाएं जिनके मकान इस बार में गिर गया उनका तत्काल अनुदान
की धनराशि भी दी जाए |

इस बार में मलेरिया बीमारियां फैल सकती हैं स्वास्थ संबंधी सेवाओं का  सक्रिय किया जाए
बाढ़ से प्रभावित रोगियों के मुफ्त उपचार की तत्काल व्यवस्था भी की जाए | बाढ़ से जो सरके
टूट गई हैं | उनकी मरम्मत कराई जाए विशेषकर यमुना के बाद को मजबूत बनाने के लिए
आवश्यक कदम उठाए जाएं बाढ़ के कारण जिन किसानों की फसलें नष्ट हो गई है | उनका
सर्वेक्षण करके तत्काल एक रिपोर्ट कृषि मंत्रालय को भेजी जाए ताकि किसानों के लिए कुछ
अतिरिक्त सुविधाओं की घोषणा की जा सके इस पत्र के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से
₹500000 का एक ड्राफ्ट भेजा जा रहा है |

आशा है किस दिशा में आप शीघ्र और आवश्यक कदम उठाएंगे |

भवदीय,
सचिव
कृषि मंत्रालय,
हरियाणा सरकार |

__________________________________________________________

शुभकामनाएं सहित !

नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |