Saturday, August 24, 2019

Vitan Chapter 4 Literature वितान अध्याय 4 गद्य भाग

विद्यार्थियों !


आज हम वितान पुस्तिका का 4 अध्याय करेंगे - डायरी के पन्ने (लेखिका - एन फ्रैंक)


प्रश्न - एन फ्रैंक की डायरी में ऐसी क्या विशेषताएं है कि वह पिछले 50 वर्षों में विश्व में सबसे अधिक
पढ़ी गई  पुस्तकों में से एक है  |
उत्तर - 
एन फ्रैंक की डायरी की विशेषताएं यह है कि यह लेखन की गहराई और  नाजी दमन के दस्तावेज के रूपमें
अपना विशेष महत्व रखती है | क्योंकि यह  डायरी इतिहास के सबसे आंतक पद और दर्दनाक अध्यायके
साक्षात अनुभवों का बयान करती है | नाजी यातना शिविरों  का रोंगटे खड़े करने वाला चित्रण दुनियाभर में
मशहूर हुई एन फ्रैंक का नाम हॉलैंड के उन हजारों लोगों की सूची में महज एक नाम के रूप में दर्जहै या जो
यातना शिविरों में  बंद थे |
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डच रेडक्रॉस ने वेस्टरबोर्ड ट्रांसिट कैंप में यातना शिविरों में भेजे गए लोगों सेसंबंधित
सूचनाएं एकत्र कर इंटरनेशनल ट्रैकिंग सर्विस को भेजे थे | इस डायरी में इस डायरी में भय, अंतक,भूख, प्यास,
मानवीय संवेदनाएं, प्रेम,घृणा बढ़ती उम्र की तकलीफ, पकड़े जाने का लगातार डर, हवाईहमले के डर,13
साल की उम्र के सपने कल्पनाएं, बाहरी दुनिया से अलग-थलग पड़ जाने की पीड़ा, मानसिक और शारीरिक
जरूरतें, हंसी मजाक, युद्ध की पीड़ा, अकेलापन सभी कुछ है | यह डायरीयहूदियों पर ढाए गए जुल्मों का
एक जीवंत दस्तावेज है यही कारण है कि यह पुस्तक पिछले 50 वर्षों मेंविश्व में सबसे अधिक पढ़ी गई
पुस्तकों में से एक है |


प्रश्न - महिलाओं के बारे में एन फ्रैंक के विचार वर्तमान जीवन मूल्यों के अनुसार कितने  प्रासंगिक हैं
उदाहरण सहित विवेचन कीजिए |
                                 अथवा 
एंट्रेंस ने अपनी डायरी में स्त्रियों की तत्कालीन पारिवारिक सामाजिक स्थितियों की चर्चा की है उनका
उल्लेख करते हुए यह बताइए कि आज उन स्थितियों में क्या परिवर्तन आए हैं |
                                   अथवा
प्रकृति प्रदत प्रजनन शक्ति के उपयोग का अधिकार बच्चे पैदा करें या ना करें अर्था कितने बच्चे पैदा
करें इसकी स्वतंत्रता स्त्री से छीन कर हमारी विश्व व्यवस्था से  ना सिर्फ स्त्री का व्यक्तित्व विकास के
अनेक अवसरों से वंचित किया बल्कि जन आधिक्य की समस्या भी पैदा की एन की डायरी 13 जून
1944 के अंश में व्यक्त विचारों के संदर्भ में इस कथन का औचित्य ढूंढे |
उत्तर - 
13 जून 1944  के अंश में ऐन फ्रैंक समाज में स्त्री की स्थिति को लेकर चिंतित दिखाई देती है | ऐन फ्रैंक 
के अनुसार पूर्व शुरू से ही नारियों का शोषण करता आया है| स्त्री को घर की चारदीवारी में बंद रखना चाहता
है जिससे वह समाज में पुरुषों से बराबरी ना कर सके | स्त्री शारीरिक दृष्टि से कमजोर होती है अतः उस पर
शासन करना अपना अधिकार समझने लगता है | वास्तव में समाज के निर्माण में जो योगदान स्त्रियों का है
वह अत्यंत ही सराहनीय है |


वर्तमान युग में  स्त्रियों की स्थिति में बहुत परिवर्तन आ चुका है | इस समाज में पुरुषों के बराबर सम्मान मिलने
लगा है | अभिक्रिया समाज में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने लगी है | अब पुरुषों की दासी न
रहकर उसकी सहयोगिनी बन गई है | आजकल स्त्रियां प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे पदों पर भी अपनी जगह
बना रही हैं | अब पुरुषों को भी समझ में आ गया है कि स्त्रियों के साथ मिलकर ही वे समाज को  ऊंचाइयों
तक ले जा सकते हैं श्री पोल द क्राइस्ट की पुस्तक ”मौत के खिलाफ”  मनुष्य का जिक्र करते हुए कहती हैं
कि आमतौर पर यह मान लिया जाता है की युद्ध में  लड़ने वाले सैनिक अत्यधिक दुख तकलीफ पीड़ा बीमारी
और  यंत्रणा से गुजरते हैं  परंतु उसका मानना है कि इससे भी कहीं अधिक दर्द औरतें बच्चे को  जन्म देते
समय झेलती  हैं | जब सैनिकों को सम्मान दिया जाता तो फिर औरतों को क्यों नहीं  | एन पुरुषों की इस
गलत मानसिकता का पर्दाफाश करती है | एन  आशावादी है कि अगली सदी में औरतें अधिक सम्मान और
प्रशंसा की हकदार होंगी और उनको समाज पूरा सम्मान देगा |


प्रश्न - ऐन फ्रैंक कौन थी? उसकी डायरी को इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज क्यों माना जाता है?
उत्तर - 
फ्रैंक परिवार की सबसे छोटी लड़की 13 वर्षीय एन फ्रैंक नीदरलैंड में अपने परिवार के साथ रह रही थी,
यह परिवार यहूदी था द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नीदरलैंड पर जर्मनी का अधिकार हो जाने के बाद फ्रेंड
परिवार अज्ञातवास में चला गया क्योंकि उस समय नालियों की संप्रदायिक नस्ली घृणा की अग्नि में
लाखों युवतियों को जलना पड़ा | एन फ्रैंक की डायरी अपने समय के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है | यह
डायरी यहूदियों पर ढाए गए  अत्याचारों का एक प्रमाणित दस्तावेज है | नाजी दमन के दस्तावेज के रूप
में यह इस डायरी का  महत्वपूर्ण स्थान है | यह डायरी इतिहास के सबसे आतंक प्रद, भयावह और दर्दनाक
अध्याय के साक्षात अनुभव को प्रतिबिंबित करती है |


प्रश्न - एन फ्रैंक ने अपनी डायरी में तत्कालीन परिस्थितियों एवं महिलाओं के अधिकारों और जीवन
शैली के बारे में एन फ्रैंक  के विचारों की सामाजिक आर्थिक परिदृश्य का जीवंत चित्रण किया है इसमें
उसके निजी सुख-दुख तथा व्यापक उत्तल पुथल का भी चित्र दिखता है | समीक्षा जीवन मूल्यों के
आधार पर कीजिए |
                         अथवा
महिलाओं के बारे में उनके विचार वर्तमान जीवन मूल्यों के अनुसार कितने प्रसांगिक है सोदाहरण
विवेचन कीजिए |
उत्तर - 
“डायरी के पन्ने”  पाठ के अंतर्गत एन फ्रैंक ने समाज में स्त्रियों की दशा को बहुत दयनीय बताया है |
वह मानती है कि पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों की शारीरिक अक्षमता का सहारा लेकर उन्हें अपने से नीचे
रखता है | पर आधुनिक समाज में जब स्त्रियों की स्थिति पहले जैसी नहीं रही एन को ऐसा लगता है कि
पुरुष स्त्री को घर तक सीमित रखना चाहते हैं जिससे वह उन पर अपनी हकूमत चला सके उनके विचारों
के अनुसार स्त्रियों को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता मिलनी चाहिए स्त्री जीवन को महत्वपूर्ण स्थान देते हुए स्त्री
जीवन के अनुभव को अतुलनीय बताती है | एन फ्रैंक  के उपरोक्त विचार वर्तमान जीवन मूल्य के अनुसार
अत्यधिक प्रसांगिक है वर्तमान समय में स्त्रियों की स्थिति में बहुत परिवर्तन आ चुका है | उन्हें समाज में
पुरुषों के समकक्ष माना जाने लगा है पुरुषों के बराबर ही अधिकार एवं सम्मान प्राप्त पुरुषों के साथ प्रत्येक
क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर चलने लगी है | पुरुष की सहयोगिनी भी बन चुकी है | आजकल राष्ट्रपति,
प्रधानमंत्री, निजी क्षेत्र की कंपनियां, सीईओ, प्रबंध निदेशक, अध्यक्ष, पायलट, सेना अधिकारी, पुलिस
अधिकारी, सिविल अधिकारी, सभी प्रमुख पदों पर नियुक्त हैं उन्होंने अपने परिश्रम और बुद्धिमता से समाज
में अपना उल्लेखनीय प्रस्तुति प्राप्त की है | पुरुष वर्ग में यह समझ विकसित हो गई है कि यदि समाज को
वह निरंतर प्रगति की ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं स्त्रियों का सहयोग अपरिहार्य है |


प्रश्न - एन ने अपनी डायरी किट्टी को संबोधित चिट्ठी की शक्ल में लिखने की जरूरत क्यों महसूस की
होगी ?
उत्तर - 
एन  की डायरी विश्व साहित्य की एक महान कृति है | यह डायरी अज्ञातवास बिताए दिनों में लिखी थी इस
डायरी में उन चिट्ठियों को संकलित किया है जो उसे अपने जन्मदिन पर उपहार स्वरूप मिली किट्टी नामक
गुड़िया के नाम लिखी थी | 13 वर्षीय एन एक भावुक किशोरी थी जब वह अपने परिवार के साथ अपने
पिता के कार्यकाल और गोदाम में अज्ञातवास काट रही थी तो वह अपने समूह में सबसे छोटी उम्र की थी
सब उसकी बात को हंसी में उड़ा देते थे कोई भी उस पर उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था | समूह के सभी
सदस्य उसे तुनक मिजाज, अकड़ और मूर्ख ही समझते थे अपने मन की बातों को किसी के साथ सांझा
करना चाहती थी | 15 वर्ष की उम्र में वे पीटर को प्रेम करने लगी थी | वह भी उसे प्रेम करता था परंतु कभी
अभिव्यक्त नहीं करता है | उसे तो बस एक धुन थी कि वह उन सभी आरोपों को गलत साबित करें जो उस
पर लगाए गए थे | अर्थात सब उसकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया करते थे | वह चाहती थी कोई हो
तो उसकी भावनाओं को समझे मगर कोई भी उसकी भावनाओं की कदर नहीं करता था इसलिए अपनी
डायरी को संबोधित करते हुए चिट्ठियों के माध्यम से मजबूरी में लिखनी पड़ी थी जो उसकी भावनाओं को
लगातार आत्मसात कर सकती थी |


प्रश्न - एन किस  कारण लगा था कि उसकी दुनिया पूरी तरह से उलट-पुलट गई थी ? 
उत्तर - 
एन के घर  बुधवार 8 जुलाई 1942 को संदेश आया था कि उसकी 16 वर्षीय बहन मार्गरेट को ए. एस. एस.
से बुलावा आया था इस बुलावे का अर्थ उसे यातना शिविर से बुलाया जाना था | जिसमें उसे जर्मन सैनिकों 
की दया पर छोड़ देना था | उनके माता - पिता को यह बिल्कुल भी स्वीकार नहीं था | इसीलिए उन्होंने तुरंत
भूमिगत हो जाने का निश्चय कर लिया था इससे उनको लगा था उसकी दुनिया पूरी तरह से उलट-पुलट हो
गई थी |


प्रश्न - थैले में क्या-क्या भरा था? क्यों?
उत्तर - 
एन  ने अपने थैले में डायरी, कलर, रुमाल, स्कूली किताबें, कंघी और पुरानी चिट्टियां भरी थी | मैं कपड़ों की
तुलना में स्मृतियों को अधिक महत्व देना चाहती थी |


प्रश्न - अंधेरे में छुपे हुए लोग अपना समय कैसे बिताते थे?
उत्तर - 
लगभग 4:00 बजे ही अंधेरा हो जाता था और वह पढ़ नहीं पाते थे इसीलिए उल जलूल हरकतों में भी अपना
समय बिताया करते थे | वह अंधेरे में व्यायाम करते थे, पहेलियां बुझाते थे | अंग्रेजी फ्रेंच बोलते थे और किताबों
की समीक्षा किया करते थे इसके अतिरिक्त अंधेरे में दूरबीन भी लगा कर  पड़ोसियों को रोशनी वाले कमरों
में झांक लिया करते थे |


प्रश्न - अज्ञातवास के समय  एन की रुचियां क्या थी?
उत्तर - 
एन की पत्रिकाओं से फिल्मी कलाकारों के चित्र कट्ठे करने की रुचि थी | वे फिल्मों के बारे में ज्ञान इकट्ठा करती
थी | उनकी समीक्षा करती थी प्रति सप्ताह प्रकाशित होने वाली सिनेमा एंड थियेटर पत्र का ध्यान से पढ़ती थी |
वह फिल्मी अभिनेत्रियों की तरह अपने बाल  संवारा करती थी और उन्हें अपना स्टाइल बनाया करती थी | कुछ
ही देर बाद फिर से वह अपने घुंघराले बालों वाले स्टाइल में ही आया जाया करती थी |

शुभकामनाओं सहित !


नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |

Sunday, July 28, 2019

Aroh Chapter 1 Poetry आरोह प्रथम अध्याय काव्य भाग

विद्यार्थियों

आज हम आरोह पुस्तिका का प्रथम अध्याय काव्य भाग -
 क) आत्मपरिचय  ख) एक गीत (कवि: हरिवंश राय बच्चन) करेंगे |

आत्मपरिचय

                                              कविता का सार
आत्मपरिचय में कवि हरिवंश राय बच्चन ने अपने प्रेममय व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला है | मैं
जीवन के कर्तव्यों और दायित्वों के प्रति सचेत जीवन के कष्टों के बीच भी प्रेम को जीवित रखे
हुए हैं | उसका हृदय किसी के प्रेम से झंकृत है | उसी प्रिया के स्नेह में डूबा रहता है | लोग तो
सामाजिक समस्याओं में उलझे रहते हैं, किंतु मैं अपने मन की भावनाओं में मग्न रहता है | उसे
प्रेम के बिना यह संसार अधूरा लगता है | इसलिए वह एक नए स्वप्निल संसार की खोज में
रहता है |

कभी अपने हृदय को प्रेम की अग्नि से प्रदीप्त रखता है | उसी आज के सहारे जीवन के सुख
दुख सहता है | उसके मन में यौवन का नशा है | नशे में वियोग और निराशा भी घिर आती है इस
कारण उसका मन रोता है, किंतु होठों पर फिर भी हंसी खेलती है | वह प्रेम -भरी यादों को
अपनी पूंजी मानता है | कभी दुनियादारी और स्वार्थ के लिए जीने वालों को नादान कहता है |
वे स्वयं ऐसे सांसारिक ज्ञान को भूलना चाहता है | वह भावनाओं के संसार में जीना चाहता है |
इसलिए मैं भावना और कल्पना के सारे रोज नई दुनिया बनाता है | उस में दोष पाए जाने पर
वह स्वयं भी उसे मिटा डालता है |

वह सांसारिक वैभव वाली दुनिया को ठोकर मारता है | कवि को अपने रुदन में भी संगीत सुनाई
पड़ता है | उसके कोमल पानी में विद्रोह की आग है उसका प्रेम चाहे खंडहर जैसा टूटा फूटा है |
वह फिर भी मैं उसके लिए राजाओं के महल से भी अधिक महत्वपूर्ण है | कभी करूदन ही उसकी
कविता में छंद बनकर फूटा है | मैं सचमुच एक दीवाना है | उसके गीतों में मादकता है | उसी
मादकता से सारे संसार में प्रेम की मस्ती घोल देना चाहता है | 

प्रश्न 1 - आशय स्पष्ट कीजिए- ‘’मैं और, और जग और, कहां का नाता |’’
उत्तर -
" मैं और, और जग और, कहां का नाता " प्रस्तुत पंक्ति से कवि का आशय यह है कि संसार से
उसका संबंध चिर स्थाई नहीं है संपूर्ण विश्व भौतिकता वादी मानसिकता से ग्रसित है जबकि उसे यह
वैभव एवं समृद्धि तुच्छ लगती है इन्हीं विचार अभिनेताओं के कारण उसे लगता है कि इस जग में और
इसमें कोई समानता नहीं है | दोनों एक दूसरे से भिन्न है |

प्रश्न 2 - आत्म परिचय पाठ में शीतल वाणी में आग होने का क्या अभिप्राय है?
उत्तर -
वाणी भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम है भावों का आवास ह्रदय है भाव कोमल एवं कठोर दोनों प्रकार
के हो सकते हैं कभी शांत भाव से कविता कर रहा है पर उसके अंदर अत्यधिक वैचारिक उथल-पुथल
है उसमें पर्याप्त आग छिपी हुई है कभी के सामान्य शब्दों में भी शक्ति क्षमता क्रांति की आग व्याप्त है
वास्तव में वह अपनी शीतल वाणी में ही जनमानस के सोए हुए हृदय को जागृत करने की शक्ति रखता
है इसी भाव को व्यक्त करते हुए कभी कहता है कि शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूं ऐसा कहकर
कवि ने विरोधाभास अलंकार का प्रदर्शन किया है |

प्रश्न 3 - नादान वही है हाय जहां पर दाना आत्मपरिचय कविता में बच्चन के इस कथन का कारण
और आशय  बताइए |
उत्तर -
नादान यानी मूर्ख व्यक्ति सांसारिक माया जाल में उलझ जाता है | और दाना का अर्थ है- बुद्धिमान और
समझदार | व्यक्ति कभी कहता कि संसार में समझदार और नासमझ दोनों तरह के लोग रहते हैं | जो
प्रत्येक कार्य सोच समझकर करते हैं वे दाना कहलाते हैं | जो बिना सोचे समझे कार्य करते हैं वे नादान
कहलाते हैं | कवि ने दोनों में अंतर बताया है |

प्रश्न 4 - कविता का शीर्षक आत्मपरिचय क्यों रखा गया अर्थात आत्म परिचय कविता के शीर्षक
की सार्थकता स्पष्ट कीजिए |
उत्तर -
आत्मपरिचय कविता में कवि स्वयं की अस्मिता को इस दुनिया के सामने प्रकट कर रहा है | उसका
ह्रदय प्यार बांटता है और संसार फिर से उस पर कटाक्ष करता है | अतः वह अपने दिल में आग लिए
घूम रहा है | अपने मन की हर बात कभी स्पष्ट रूप से कह रहा है | वह अपने भग्न स्वप्नों का खंडहर
ढो रहा है | अपनी संपूर्ण मादकता को लेकर घूम रहा है | इस प्रकार कविता की एक-एक पंक्ति
उनका परिचय दे रही है | अतः आत्मपरिचय शिक्षक सर्वथा उचित एवं सार्थक है |

प्रश्न 5 - कविता एक और जग जीवन का भार लिए घूमने की बात करती है और दूसरी और मैं
जग का ध्यान किया करता हूं विपरीत से लगते इन कथनों का क्या आशय है?
उत्तर -
आत्मपरिचय कविता की प्रथम पंक्ति में कवि कहता कि मैं जग जीवन का भार लिए फिरता हूं और
आगे चलकर कहता है मैं कभी ना जग का ध्यान किए करता हूं दोनों कथनों में विरोधाभास है | दोनों में
विरोधाभास इस बात का परिचायक है कि संसार में हमारा नाता वास्तव में प्रीति और कलह का है |
संसार का भार हमारे मन मस्तिष्क पर निश्चित रूप से पड़ता है |

दुनिया अपने व्यंग बानो और अपने तौर तरीकों तथा शासन प्रशासन में चाहे जितना कष्ट दे किंतु
इस दुनिया से जुड़े रहना मनुष्य की मजबूरी है | अपने समाज में पूरी तरह कट कर मनुष्य नहीं रह सकता
क्योंकि यही हमारा उत्साह और हमारी अस्मिता है | हमारा सब कुछ है कभी संसार इक्ता की प्रवृतियां
और जगत के व्यवहार से उभरे कष्ट के बाद उससे मु क्ति की आकांक्षा भी पालता है |

एक गीत

                                              कविता का सार
दिन जल्दी जल्दी ढलता है” कवि हरिवंश राय बच्चन के कविता संग्रह, “निशा निमंत्रण” से उद्धृत है |
इस गीत में प्रकृति के नित्य परिवर्तन होते रूपों में मनुष्य के धड़कते हृदय को सुनने का प्रयास किया
गया है | किसी प्रिय आलंबन या विषय से साक्षात्कार होने की आशा हमारे प्रयासों को गति प्रदान
करती है | अन्यथा हमें शिथिलता आ जाती है | समय बीतते जाने का एहसास हमें लक्ष्य प्राप्ति के
लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित करता है | अपने विचारों को स्पष्ट करने के लिए कभी ने दो दृष्टांत
दिए हैं |

मार्ग पर चलने वाला राही यह सोचकर जल्दी-जल्दी अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ाता है, कि
कहीं रास्ते में ही रात ना हो जाए | इस बात से उसमें थकान में भी उत्साह का संचार होता है | उसकी
मंजिल अब दूर नहीं रही | लक्ष्य प्राप्ति की आशा और बीच मार्ग में रात होने का भय, थके हुए राही
को जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है | पक्षियों को भी दिन बीतने के साथ एहसास
होता है, कि उनके बच्चे कुछ पाने की आशा में घोंसलो से झांक रहे होंगे | यह सोचकर उनके पंखों
में गति आ जाती है, ताकि वे जल्दी से अपने बच्चों से मिल सके | 

कवि की स्थिति पथिक और पक्षियों से विपरीत है, क्योंकि उससे मिलने को कोई व्याकुल नहीं है |
इसलिए उसे घर पहुंचने की भी कोई जल्दी नहीं है | जब हृदय में किसी प्रकार की आशा अथवा
उत्साह ना हो तो पैरों की गति में शिथिलता आ जाती है | कवि को न तो मार्ग में ही रात होने का
भय है, न लक्ष्य- प्राप्ति की चिंता ,इसलिए वह शिथिल है | किंतु फिर भी  कवि को लगता है कि
दिन बहुत जल्दी जल्दी बीत जाता है अर्थात जीवन में समय अत्यंत तेज गति से बीत जाता है |

प्रश्न 1 - दिन जल्दी जल्दी ढलता है कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए |
उत्तर -
इस कविता में कवि में प्रेम की व्यग्रता और व्याकुलता को व्यक्त किया है पथिक को अपने प्रिय जनों
से जल्दी मिलने की इच्छा है | इसलिए वह जल्दी जल्दी चलने का प्रयास करता है इस प्रकार अपने
बच्चों को के विषय में सोच कर पक्षियों के  परों में गति आ जाती है | वह जल्दी-से-जल्दी अपने  नीड़ो
की ओर लौटना चाहते हैं जबकि कवि अकेला है किसी को उसकी प्रतीक्षा नहीं है इसीलिए कवि के
कदमों में शिथिलता तथा मन में व्याकुलता है यहां कवि मानता है कि जीवन की गति में तीव्रता का
कारण प्रेम है |

प्रश्न 2 - दिन जल्दी-जल्दी ढलता है कविता में कभी अपने घर की ओर लौटने में शिथिल और 
अनु उत्साहित क्यों है?
उत्तर -
कवि कहता है कि दिन ढलने पर जब वह घर की ओर कदम बढ़ाता है तो उसे यह देखकर सुखद
अनुभूति होती है कि अपने-अपने प्रतीक्षारत परिजनों से मिलने के लिए व्याकुल जीव थकावट के बावजूद
भी कितनी सुरती से घर की ओर जा रहा है उसके मन में विचार उठता है कि उसकी प्रतीक्षा तो कोई
नहीं करता उसके लिए तो कोई व्याकुल नहीं होता इस विचार के मन में आते ही उसकी गति शिथिल हो
जाती है और मैं धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए अपने घर की ओर अग्रसर होता है |

प्रश्न 3 - दिन जल्दी जल्दी ढलता है कि आवृत्ति से कविता की किस विशेषता का पता चलता है?
उत्तर -
रात के आगमन की अनुभूति से सभी पंथी अपने अपने घरों की ओर तेजी से लौट रहे हैं सभी के घरों में
उनका प्रतीक्षा के लिए कोई ना कोई अपना प्रिय जन यात्री भी व्याकुल रहता है कोई हमारी प्रतीक्षा कर
रहा है यही बात घर पहुंचने के लिए उनके कदमों की गति बढ़ा देती है लेकिन दुख की बात यह है कि
कवि के इंतजार में पलकें बिछाए कोई नहीं बैठा है यही तथ्य याद आने पर कवि की घर लौटने की
इच्छा शिथिल हो जाती है किसी का उसके प्रतीक्षारत ना होना उसे व्याकुल कर देता है |

प्रश्न 4 - बच्चे किस बात की आशा से नीडो से जाग रहे होंगे?
उत्तर -
बच्चे अर्थात चिड़िया के शिशु अपने चिड़िया के शिशु अपने नीडो से निकल कर अपने माता-पिता की
प्रतीक्षा करते हैं जो उनके लिए भोजन एवं स्नेह लेकर लौटते है | बच्चे आशावादी होते हैं वे दाना पाने
और अपनी मां के शीघ्र लौटाने की आस लिए नीडो से झांक रहे होंगे | वे सुबह से शाम तक आशा एवं
धैर्य के साथ अपने लिए स्नेह एवं भोजन की प्रतीक्षा करते हैं |

शुभकामनाओं सहित !

नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |