विद्यार्थियों !
आज हम वितान पुस्तिका का 4 अध्याय करेंगे - डायरी के पन्ने (लेखिका - एन फ्रैंक)
प्रश्न - एन फ्रैंक की डायरी में ऐसी क्या विशेषताएं है कि वह पिछले 50 वर्षों में विश्व में सबसे अधिक
पढ़ी गई पुस्तकों में से एक है |
उत्तर -
एन फ्रैंक की डायरी की विशेषताएं यह है कि यह लेखन की गहराई और नाजी दमन के दस्तावेज के रूपमें
अपना विशेष महत्व रखती है | क्योंकि यह डायरी इतिहास के सबसे आंतक पद और दर्दनाक अध्यायके
साक्षात अनुभवों का बयान करती है | नाजी यातना शिविरों का रोंगटे खड़े करने वाला चित्रण दुनियाभर में
मशहूर हुई एन फ्रैंक का नाम हॉलैंड के उन हजारों लोगों की सूची में महज एक नाम के रूप में दर्जहै या जो
यातना शिविरों में बंद थे |
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डच रेडक्रॉस ने वेस्टरबोर्ड ट्रांसिट कैंप में यातना शिविरों में भेजे गए लोगों सेसंबंधित
सूचनाएं एकत्र कर इंटरनेशनल ट्रैकिंग सर्विस को भेजे थे | इस डायरी में इस डायरी में भय, अंतक,भूख, प्यास,
मानवीय संवेदनाएं, प्रेम,घृणा बढ़ती उम्र की तकलीफ, पकड़े जाने का लगातार डर, हवाईहमले के डर,13
साल की उम्र के सपने कल्पनाएं, बाहरी दुनिया से अलग-थलग पड़ जाने की पीड़ा, मानसिक और शारीरिक
जरूरतें, हंसी मजाक, युद्ध की पीड़ा, अकेलापन सभी कुछ है | यह डायरीयहूदियों पर ढाए गए जुल्मों का
एक जीवंत दस्तावेज है यही कारण है कि यह पुस्तक पिछले 50 वर्षों मेंविश्व में सबसे अधिक पढ़ी गई
पुस्तकों में से एक है |
प्रश्न - महिलाओं के बारे में एन फ्रैंक के विचार वर्तमान जीवन मूल्यों के अनुसार कितने प्रासंगिक हैं
उदाहरण सहित विवेचन कीजिए |
अथवा
एंट्रेंस ने अपनी डायरी में स्त्रियों की तत्कालीन पारिवारिक सामाजिक स्थितियों की चर्चा की है उनका
उल्लेख करते हुए यह बताइए कि आज उन स्थितियों में क्या परिवर्तन आए हैं |
अथवा
प्रकृति प्रदत प्रजनन शक्ति के उपयोग का अधिकार बच्चे पैदा करें या ना करें अर्था कितने बच्चे पैदा
करें इसकी स्वतंत्रता स्त्री से छीन कर हमारी विश्व व्यवस्था से ना सिर्फ स्त्री का व्यक्तित्व विकास के
अनेक अवसरों से वंचित किया बल्कि जन आधिक्य की समस्या भी पैदा की एन की डायरी 13 जून
1944 के अंश में व्यक्त विचारों के संदर्भ में इस कथन का औचित्य ढूंढे |
उत्तर -
13 जून 1944 के अंश में ऐन फ्रैंक समाज में स्त्री की स्थिति को लेकर चिंतित दिखाई देती है | ऐन फ्रैंक
के अनुसार पूर्व शुरू से ही नारियों का शोषण करता आया है| स्त्री को घर की चारदीवारी में बंद रखना चाहता
है जिससे वह समाज में पुरुषों से बराबरी ना कर सके | स्त्री शारीरिक दृष्टि से कमजोर होती है अतः उस पर
शासन करना अपना अधिकार समझने लगता है | वास्तव में समाज के निर्माण में जो योगदान स्त्रियों का है
वह अत्यंत ही सराहनीय है |
वर्तमान युग में स्त्रियों की स्थिति में बहुत परिवर्तन आ चुका है | इस समाज में पुरुषों के बराबर सम्मान मिलने
लगा है | अभिक्रिया समाज में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने लगी है | अब पुरुषों की दासी न
रहकर उसकी सहयोगिनी बन गई है | आजकल स्त्रियां प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे पदों पर भी अपनी जगह
बना रही हैं | अब पुरुषों को भी समझ में आ गया है कि स्त्रियों के साथ मिलकर ही वे समाज को ऊंचाइयों
तक ले जा सकते हैं श्री पोल द क्राइस्ट की पुस्तक ”मौत के खिलाफ” मनुष्य का जिक्र करते हुए कहती हैं
कि आमतौर पर यह मान लिया जाता है की युद्ध में लड़ने वाले सैनिक अत्यधिक दुख तकलीफ पीड़ा बीमारी
और यंत्रणा से गुजरते हैं परंतु उसका मानना है कि इससे भी कहीं अधिक दर्द औरतें बच्चे को जन्म देते
समय झेलती हैं | जब सैनिकों को सम्मान दिया जाता तो फिर औरतों को क्यों नहीं | एन पुरुषों की इस
गलत मानसिकता का पर्दाफाश करती है | एन आशावादी है कि अगली सदी में औरतें अधिक सम्मान और
प्रशंसा की हकदार होंगी और उनको समाज पूरा सम्मान देगा |
प्रश्न - ऐन फ्रैंक कौन थी? उसकी डायरी को इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज क्यों माना जाता है?
उत्तर -
फ्रैंक परिवार की सबसे छोटी लड़की 13 वर्षीय एन फ्रैंक नीदरलैंड में अपने परिवार के साथ रह रही थी,
यह परिवार यहूदी था द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नीदरलैंड पर जर्मनी का अधिकार हो जाने के बाद फ्रेंड
परिवार अज्ञातवास में चला गया क्योंकि उस समय नालियों की संप्रदायिक नस्ली घृणा की अग्नि में
लाखों युवतियों को जलना पड़ा | एन फ्रैंक की डायरी अपने समय के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है | यह
डायरी यहूदियों पर ढाए गए अत्याचारों का एक प्रमाणित दस्तावेज है | नाजी दमन के दस्तावेज के रूप
में यह इस डायरी का महत्वपूर्ण स्थान है | यह डायरी इतिहास के सबसे आतंक प्रद, भयावह और दर्दनाक
अध्याय के साक्षात अनुभव को प्रतिबिंबित करती है |
प्रश्न - एन फ्रैंक ने अपनी डायरी में तत्कालीन परिस्थितियों एवं महिलाओं के अधिकारों और जीवन
शैली के बारे में एन फ्रैंक के विचारों की सामाजिक आर्थिक परिदृश्य का जीवंत चित्रण किया है इसमें
उसके निजी सुख-दुख तथा व्यापक उत्तल पुथल का भी चित्र दिखता है | समीक्षा जीवन मूल्यों के
आधार पर कीजिए |
अथवा
महिलाओं के बारे में उनके विचार वर्तमान जीवन मूल्यों के अनुसार कितने प्रसांगिक है सोदाहरण
विवेचन कीजिए |
उत्तर -
“डायरी के पन्ने” पाठ के अंतर्गत एन फ्रैंक ने समाज में स्त्रियों की दशा को बहुत दयनीय बताया है |
वह मानती है कि पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों की शारीरिक अक्षमता का सहारा लेकर उन्हें अपने से नीचे
रखता है | पर आधुनिक समाज में जब स्त्रियों की स्थिति पहले जैसी नहीं रही एन को ऐसा लगता है कि
पुरुष स्त्री को घर तक सीमित रखना चाहते हैं जिससे वह उन पर अपनी हकूमत चला सके उनके विचारों
के अनुसार स्त्रियों को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता मिलनी चाहिए स्त्री जीवन को महत्वपूर्ण स्थान देते हुए स्त्री
जीवन के अनुभव को अतुलनीय बताती है | एन फ्रैंक के उपरोक्त विचार वर्तमान जीवन मूल्य के अनुसार
अत्यधिक प्रसांगिक है वर्तमान समय में स्त्रियों की स्थिति में बहुत परिवर्तन आ चुका है | उन्हें समाज में
पुरुषों के समकक्ष माना जाने लगा है पुरुषों के बराबर ही अधिकार एवं सम्मान प्राप्त पुरुषों के साथ प्रत्येक
क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर चलने लगी है | पुरुष की सहयोगिनी भी बन चुकी है | आजकल राष्ट्रपति,
प्रधानमंत्री, निजी क्षेत्र की कंपनियां, सीईओ, प्रबंध निदेशक, अध्यक्ष, पायलट, सेना अधिकारी, पुलिस
अधिकारी, सिविल अधिकारी, सभी प्रमुख पदों पर नियुक्त हैं उन्होंने अपने परिश्रम और बुद्धिमता से समाज
में अपना उल्लेखनीय प्रस्तुति प्राप्त की है | पुरुष वर्ग में यह समझ विकसित हो गई है कि यदि समाज को
वह निरंतर प्रगति की ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं स्त्रियों का सहयोग अपरिहार्य है |
प्रश्न - एन ने अपनी डायरी किट्टी को संबोधित चिट्ठी की शक्ल में लिखने की जरूरत क्यों महसूस की
होगी ?
उत्तर -
एन की डायरी विश्व साहित्य की एक महान कृति है | यह डायरी अज्ञातवास बिताए दिनों में लिखी थी इस
डायरी में उन चिट्ठियों को संकलित किया है जो उसे अपने जन्मदिन पर उपहार स्वरूप मिली किट्टी नामक
गुड़िया के नाम लिखी थी | 13 वर्षीय एन एक भावुक किशोरी थी जब वह अपने परिवार के साथ अपने
पिता के कार्यकाल और गोदाम में अज्ञातवास काट रही थी तो वह अपने समूह में सबसे छोटी उम्र की थी
सब उसकी बात को हंसी में उड़ा देते थे कोई भी उस पर उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था | समूह के सभी
सदस्य उसे तुनक मिजाज, अकड़ और मूर्ख ही समझते थे अपने मन की बातों को किसी के साथ सांझा
करना चाहती थी | 15 वर्ष की उम्र में वे पीटर को प्रेम करने लगी थी | वह भी उसे प्रेम करता था परंतु कभी
अभिव्यक्त नहीं करता है | उसे तो बस एक धुन थी कि वह उन सभी आरोपों को गलत साबित करें जो उस
पर लगाए गए थे | अर्थात सब उसकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया करते थे | वह चाहती थी कोई हो
तो उसकी भावनाओं को समझे मगर कोई भी उसकी भावनाओं की कदर नहीं करता था इसलिए अपनी
डायरी को संबोधित करते हुए चिट्ठियों के माध्यम से मजबूरी में लिखनी पड़ी थी जो उसकी भावनाओं को
लगातार आत्मसात कर सकती थी |
प्रश्न - एन किस कारण लगा था कि उसकी दुनिया पूरी तरह से उलट-पुलट गई थी ?
उत्तर -
एन के घर बुधवार 8 जुलाई 1942 को संदेश आया था कि उसकी 16 वर्षीय बहन मार्गरेट को ए. एस. एस.
से बुलावा आया था इस बुलावे का अर्थ उसे यातना शिविर से बुलाया जाना था | जिसमें उसे जर्मन सैनिकों
की दया पर छोड़ देना था | उनके माता - पिता को यह बिल्कुल भी स्वीकार नहीं था | इसीलिए उन्होंने तुरंत
भूमिगत हो जाने का निश्चय कर लिया था इससे उनको लगा था उसकी दुनिया पूरी तरह से उलट-पुलट हो
गई थी |
प्रश्न - थैले में क्या-क्या भरा था? क्यों?
उत्तर -
एन ने अपने थैले में डायरी, कलर, रुमाल, स्कूली किताबें, कंघी और पुरानी चिट्टियां भरी थी | मैं कपड़ों की
तुलना में स्मृतियों को अधिक महत्व देना चाहती थी |
प्रश्न - अंधेरे में छुपे हुए लोग अपना समय कैसे बिताते थे?
उत्तर -
लगभग 4:00 बजे ही अंधेरा हो जाता था और वह पढ़ नहीं पाते थे इसीलिए उल जलूल हरकतों में भी अपना
समय बिताया करते थे | वह अंधेरे में व्यायाम करते थे, पहेलियां बुझाते थे | अंग्रेजी फ्रेंच बोलते थे और किताबों
की समीक्षा किया करते थे इसके अतिरिक्त अंधेरे में दूरबीन भी लगा कर पड़ोसियों को रोशनी वाले कमरों
में झांक लिया करते थे |
प्रश्न - अज्ञातवास के समय एन की रुचियां क्या थी?
उत्तर -
एन की पत्रिकाओं से फिल्मी कलाकारों के चित्र कट्ठे करने की रुचि थी | वे फिल्मों के बारे में ज्ञान इकट्ठा करती
थी | उनकी समीक्षा करती थी प्रति सप्ताह प्रकाशित होने वाली सिनेमा एंड थियेटर पत्र का ध्यान से पढ़ती थी |
वह फिल्मी अभिनेत्रियों की तरह अपने बाल संवारा करती थी और उन्हें अपना स्टाइल बनाया करती थी | कुछ
ही देर बाद फिर से वह अपने घुंघराले बालों वाले स्टाइल में ही आया जाया करती थी |
शुभकामनाओं सहित !
नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
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