Sunday, April 26, 2020

Aroh Chapter 2 Poetry आरोह अध्याय दो काव्य भाग

विद्यार्थियों


आज हम आरोह पुस्तिका का अध्याय 2 काव्य भाग -
पतंग (कवि: आलोक धन्वा) करेंगे |


                                                कविता का सार
पतंग कविता में शरद ऋतु की चमक और बाल मन की उमंग का सुंदर चित्रण हुआ है | आषाढ़
और भादो की मूसलाधार वर्षा के समाप्त होते ही, खरगोश की लाल आंखों की भांति लालिमा
लिए प्रातः काल  शरद का उजाला हुआ | प्रकृति में चमकीली धूप और उमंग छा गई| बच्चे पतंग
उड़ाने चले मौसम साफ हो गया | आकाश मुलायम हो गया पतंगे उड़ने लगी बच्चे सीटीयां और
किलकारियां मारते हुए दौड़ने लगे |


कोमल बच्चे अपने जन्म से ही कपास के समान कोमलता लेकर आते हैं | उनके पैर पूरी पृथ्वी
पर घूम आने के लिए बेचैन रहते हैं | वे छतों पर इस तरह बेसुध होकर दौड़ते हैं, मानो छत्ते
कठोर ना होकर नरम हो | वह डाल की तरह  पेंग भरते हुए चलते हैं | उनकी गति पाकर दिशाएं
मृदंग की भांति बजने लगती है | खेलते हुए उनका शरीर इतना रोमांचित हो जाता है ,कि वही
रोमांच उन्हें गिरने से भी बचाता है | मानो पतंग की ऊंचाइयां उन्हें गिरने से भी रोक लेती हैं | बच्चे
मानो पतंगों की तरह पतंगों के साथ ही उड़ते हैं | कभी-कभी छतों के खतरनाक किनारों से भी
गिर जाते हैं | तब उनका साहस और आत्मविश्वास और भी ज्यादा बढ़ जाता है | 


प्रश्न 1 - सबसे तेज बौछारें गई, भादो गया’ के बाद प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने दिखाया
है, उनका वर्णन अपने शब्दों में करें |
उत्तर -
पतंग कविता प्राकृतिक सौंदर्य से ओतप्रोत है | सबसे तेज बौछारें भादो के जाने के बाद सवेरा
हुआ जो अत्यंत लालिमा और सुंदरता से परिपूर्ण था | वह सवेरा खरगोश की आंखों के समान
लाल रंग का था | कवि ने शरद ऋतु का मानवीकरण किया है| बच्चे अपनी चमकीली साइकिल
पर सवार होकर घंटी बजाते हुए आए और चमकीले इशारों से अपने दोस्तों को बुलाने लगे |
आकाश इतना मुलायम और सुंदर बन गया | चारों तरफ चारों तरफ सीटिया और किलकारियां
की आवाजें गूंज उठी | पतंगबाजी का उपयुक्त मौसम आ गया |


प्रश्न 2 - पतंग कविता के आधार पर बताइए कि पतंग के लिए सबसे हल्की और  रंगीन
चीज, सबसे पतला कागज, सबसे पतली कमानीजैसे विशेषणओं का प्रयोग क्यों किया
गया है?
उत्तर - 
पतंग कविता में पतंग के लिए सबसे हल्की और रंगीन चीज, सबसे पतला कागज, सबसे पतली
कमानी जैसे विशेषनो का प्रयोग उसमें आकर्षण लाने के लिए किया गया है | जिसमें पाठक के
मन में जिज्ञासा और  कौतूहल उत्पन्न हो और वे आकर्षित हो | वास्तव में, पतंग का निर्माण इन्हीं
चीजों से होता है | सबसे हल्की इसलिए कि उड़ने वाले कोई भी वस्तु इससे अधिक हल्की व
पतली नहीं होती | सबसे रंगीन इसलिए कि इंद्रधनुष में तो 7 रंग होते हैं और पतंगे कई रंगों की
होती है | सबसे पतला कागज इसलिए की बूंद पढ़ते ही फर फर करके हवा के उड़ने वाला यह
कागज फट जाता है | सबसे पतली कमानी इसलिए क्योंकि बांस की पतली छाल से पतंग की
पतली कमानी बनती है | इन्हीं अति सामान्य सी चीजों से निर्मित पतंग आकाश की
अनंतऊंचाइयां तक जा पहुंचती है |


प्रश्न 3 - आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों को देखकर आपके मन में कैसे ख्याल आते हैं पतंग
कविता के आधार पर लिखिए |
उत्तर -
शरद ऋतु की खिलखिलाती सुहावनी सुबह से ही आकाश में पतंगे उड़ने लगती हैं | यह पतंगे
हल्की, रंगीन और पतली कमानी वाली होती हैं | इन पतंगों को  आकाश में उड़ता हुआ देखकर
मन में ऐसा ख्याल आता है, कि मानो यह आकाश एक उद्यान है | जिसमें उड़ती रंग बिरंगी पतंगे
तितलियों के समान आकर्षण दिखाई देती है और संपूर्ण आकाश पुष्पों के गुलदस्ते के समान
मनमोहक दिखाई देता है | और यह पूरा दृश्य मन को छू लेने वाला होता है |


प्रश्न 4 - आप कैसे कह सकते हैं कि कवि ने पतंग कविता में बाल सुलभ साहस एवं
आकांक्षाओं चित्रण किया है | अपने शब्दों में लिखिए |
उत्तर -
पतंग कविता में कवि ने बच्चों की तुलना पतंग से की है | पतंग के माध्यम से बाल सुलभ इच्छाओं
एवं उमंगो का अत्यंत सुंदर चित्रण हुआ है | बाल सुलभ क्रियाकलापों एवं प्राकृतिक परिवर्तनों की
अभिव्यक्ति हेतु कविता में सुंदर बिंबों का प्रयोग किया गया है| बच्चों की उमंगों का रंग बिरंगा
सपना है - पतंग | आकाश में उड़ती रंग बिरंगी  तितलियों जैसी पतंगे उन्हें आकर्षित करती हैं |
बालमन इन्हें अपने हाथों से छूना चाहता है और उसके पार जाना चाहता है | इस प्रक्रिया में गिरने
वाले और गिर कर संभलने वाले बच्चे भी शामिल होते हैं | वस्तुतः पतंग उनकी स्वतंत्रता, स्वच्छंदता
एवं नई उमंग व उत्साह का प्रतीक है |


प्रश्न 5 - कवि आलोक धन्वा ने अपनी कविता पतंग में बच्चे के मन की तुलना  कपास से
क्यों की है?
उत्तर -
कवि आलोक धन्वा ने अपनी कविता पतंग में बच्चे की मन की तुलना कपास से इसलिए की है,
क्योंकि जिस प्रकार कपास का रेशा कोमल एवं लचीला होता है | उसी तरह बच्चे भी कपास के
समान हल्के, मासूम और कोमल भावनाओं तथा लचीले शरीर वाले होते हैं | उनमें कपास के जैसा
आकर्षण भी होता है कपास के समान ही पवित्र एवं निर्मल होते हैं | अतः कोमलता, निर्मलता एवं
पवित्रता के आधार पर कपास और बच्चे के मन की तुलना की गई है |


प्रश्न 6 - पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है?
                                         अथवा 
पतंग कविता में कवि ने बच्चों की तुलना किससे की है और क्यों ? उदाहरण सहित समझाएं |
उत्तर - 
जिस प्रकार पतंग आकाश में उड़ती हुई ऊंचाइयां छूती है, उसी प्रकार बच्चे भी छतों पर निश्चिंत
डोलते हैं | वे पतंग को उड़ता देखकर अत्यधिक उत्साह और उमंग से भर जाते हैं | तब वे न तो
खतरनाक ऊंचाइयों का ध्यान रखते हैं, ना गिरने का वह तो बस अपने शरीर के तरंगित संगीत
की लय पर पतंग के समान उड़ते प्रतीत होते हैं | वास्तव में वह भी छत ऊपर उड़ती हुई पतंग
से ही हो जाते हैं | इस  समानता के कारण ठीक ही कहा गया कि पतंगों के साथ-साथ बच्चे
भी उड़ रहे हैं |


शुभकामनाओं सहित !

नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |

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