विद्यार्थियों!
आज हम आरोह पुस्तिका का तीसरा अध्याय गद्य भाग - काले मेघा पानी दे (लेखक: धर्मवीर भारती) करेंगे |
प्रश्न 1- धर्मवीर भारती द्वारा रचित काले मेघा पानी दे लोगों ने लड़कों की टोली को मेंढक
मंडली नाम किस आधार पर दिया यह टोली अपने आप को इंद्रसेना कहकर क्यों बुलाती थी?
उत्तर -
लोगों ने लड़कों की टोली को मेंढक मंडली नाम इसलिए दिया क्योंकि यह डोली अपने नग्न स्वरूप
शरीर उछलते कूदते शोर शराबा करती हुई गली-गली घूमती थी | इस के कारण ही गली में कीचड़
हो जाते थे | यह मंडली स्वयं को इंद्रसेना कहती थी | क्योंकि आम लोग द्वारा वर्षा के लिए किए गए
पूजा पाठ, कथा विधान जैसे कर्म जब प्रभावहीन हो जाते थे | तब यह टोली निकलती थी ऐसी मान्यता
थी कि चोली पर बीज रूप से पानी डालने से इंद्र देवता प्रसन्न होंगे और वर्षा रूपी सफल होगी और ना
ही मानती थी |
प्रश्न 2 - काले मेघ पाठ जीके अकाट्य तर्क का उल्लेख कर उस पर अपने विचार कीजिए?
अथवा
इंदौर सेना पर पानी टैंकर जाने पर लेखक की मान्यता को दीदी कैसे छिन्न-भिन्न कर देती है
स्पष्ट कीजिए ?
अथवा
सूखे के समय इंद्रसेना पर पानी डालना कहां की बुद्धिमानी है लेखक की इस उलझन को
उसकी जीजी ने किस तरह सुलझाया ?
उत्तर -
लेखक इस बात से दुखी होता है कि जहां चारों ओर पानी की इतनी कमी है वही लोग बड़ी
कठिनाई से इकट्ठा किए हुआ पानी इंद्रसेना के लड़कों पर फेंककर बर्बाद कर देते हैं | यह बात
कतई बुद्धिमानी की नहीं लगती लेकिन उसकी इस उलझन को उसकी जीजी ने सुलजाते हुए
इस कृत्य के पक्ष में अगर लिखित तर्क प्रस्तुत किए -
1 - जब हम किसी से कुछ पाना चाहते हैं तो हमें पहले कुछ चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है पानी फेंककर
वस्तुतः पानी का अर्क चढ़ाया जाता है |
2 - मनुष्य को पहले त्याग करना चाहिए इसके पश्चात फल की आशा करनी चाहिए त्याग उसी
वस्तु का मान्य होता है , जिसकी त्याग करने वाले को भी बहुत आवश्यकता होती है | पानी के
साथ भी यही तर्क लागू है |
3 - खेतों से अच्छी फसल पाने के लिए पहले उसमें अच्छे बीजों को डालना पड़ता है | पानी पीने
के इच्छा की पूर्ति के लिए भी बीज रूप में पानी की बुआई करना आवश्यक है, अन्यथा पानी की
अच्छी फसल नहीं मिलेगी इंद्रसेना के सदस्यों पर पानी फैंका जाना पानी की बुवाई है |
यदि हम लेखक के स्थान पर होते तो जीजी के तर्क सुनकर हम भी चुप रहते, क्योंकि तर्क
करने से जीजी शायद ही कुछ समझ पाती, पर उनके दिल अवश्य दुखता और इसी कारण
उनका स्नेह हमारे प्रति कम हो जाता | लेखक की भांति हम भी जी जी के प्यार और सद्भाव
को खोना नहीं चाहते | इसी कारण बहुत सी बेतुकी परंपराएं अभी भी हमारे देश को जकड़े हुए हैं |
प्रश्न 3 - मेंढक मंडली पर पानी डालने को लेकर लेखक और डी जी के विचारों में क्या
भिन्नता थी ?
अथवा
इंद्रसेना के बारे में लेखक और जीजी की राय में क्या अंतर था? आप किस के विचारों से
सहमत हैं?
उत्तर -
जीजी के अनुसार, इंद्रसेना पर पानी डालना जल की बर्बादी नहीं थी, बल्कि यह त्याग की भावना
थी | वे मानती हैं कि जिस प्रकार किसान अनाज उगाने से पहले कुछ अनाज धरती में होता है, उसी
प्रकार गांव वाले इंद्रसेना पर पानी फेंकते हैं| जिससे भगवान खुश होकर वर्षा करके धरती को
हरा-भरा कर देते हैं | लेखक को यह सब अंधविश्वास लगता था और जल की बर्बादी भी लगती थी |
हम लेखक के इस विचार से सहमत हैं क्योंकि जल को बर्बाद करना उचित नहीं कहा जा सकता |
अतः कहा जा सकता है कि इंद्रसेना के विषय में लेखक और जीजी की राय में पर्याप्त अंतर है,
लेकिन मेरे विचार से लेखक की राय अधिक मान्य है |
प्रश्न 4- 'गगरी फूटी…. बैल प्यासा' से लेखक का क्या आशय है?
अथवा
गगरी फूटी बैल प्यासा इंद्रसेना के इस खेल गीत में बैलों के प्यासा रहने की बात क्यों मुखरित
हुई है?
उत्तर-
भारत में बैल कृषि की रीढ रहे हैं वहीं खेतों को जोड़कर अन्न उप जाते जाते हैं | उनके त्याग से रहने
से सारी कृषि के नष्ट होने का खतरा है | अतः लेखक संकेत के माध्यम से यही कहना चाहता है कि
वर्षा के बिना खेती शुरू की जा रही है खेती के धार कहे जाने वाले बैल मर रहे हैं | वर्षा पानी बैल
भोजन सब का आपस में गहरा संबंध है | वर्षा से जब पानी मिलता है तो बैल पानी पीकर खेतों पर
जाते हैं | फसल उगती है और ग्रामीणों को भोजन मिलता है | परंतु इसके विपरीत जेठ माह के
बीतने के बाद अषाढ़ के 15 दिन बीत चुके हैं | बारिश होने के लक्षण दिखाई नहीं दे रहे | सूखने
लगे नलों में पानी नहीं आता | खेत की मिट्टी सुख सुख कर पत्थर हो गई है | अपनी पढ़कर खेतों
में दरारें पड़ने लग गई हैं | लेखक ग्रामीण जीवन की इन सभी कठिनाइयों को देखकर सोचता है
कि व्यवस्था में इतना भ्रष्टाचार व्याप्त है कि हमारी सरकार प्रत्येक वर्ष ग्रामीण विकास के लिए
अनेक योजनाएं बनाती है, परंतु उनका लाभ जनता तक नहीं पहुंचता | जिसके कारण भारतीय
किसान आत्महत्या करने के लिए विवश हैं |
प्रश्न 5 - काले मेघा पानी दे संस्मरण के लेखक ने लोक प्रचलित विश्वासों को अंधविश्वास
कहकर उनके निराकरण पर बल दिया है इस कथन की विवेचना कीजिए |
उत्तर -
लेखक ने इंद्रसेना के कार्यक्रमों को अंधविश्वास का नाम दिया है | आम आदमी इंद्रसेना के
काम को लोक प्रचलित विश्वास कहते हैं, परंतु लेखक उन्हें गलत बताता है | लेखक इन
अंधविश्वासों को खत्म करने के लिए कहता है, क्योंकि इन्हें दूर करने से ही समाज का विकास
हो सकता है |
प्रश्न 6 - काले मेघा पानी दे पाठ की इंद्रसेना युवाओं को रचनात्मक कार्य करने की प्रेरणा
दे सकती है तर्क सहित उत्तर दीजिए |
उत्तर -
इंद्रसेना अपने क्रियाकलापों द्वारा युवाओं को रचनात्मक कार्य करने की प्रेरणा दे सकती है |
यह सामूहिक प्रयास कहलाता है इंद्रसेना में इतनी क्षमता है कि वह समाज में व्यापक बुराइयों
को दूर कर सकती हैं | वे लोग कमजोर वर्ग के पक्ष में आवाज उठा सकते हैं तथा शोषणकारी
शक्तियों को जाम कर विरोध कर सकते हैं | अतः यदि युवा चाहे तो वह मिलकर समाज को बहुत
ऊंचे स्तर पर ले जा सकते हैं |
शुभकामनाओं सहित !
नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
1 comment:
Thank you so much ma'am for this great help.This method is very helpful for us.
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