Sunday, July 28, 2019

Aroh Chapter 2 Literature आरोह अध्याय दो गद्य भाग

विद्यार्थियों!

आज हम आरोह पुस्तिका का अध्याय दो गद्य भाग - बाजार दर्शन (लेखक: जैनेंद्र कुमार) करेंगे |


प्रश्न 1 - बाजार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या क्या असर पड़ता है? 
उत्तर -
बाजार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर निम्नलिखित असर पड़ता है:-
1. बाजार का जादू चढ़ने पर मनुष्य उसकी ओर उसी प्रकार से खिंचा चला जाता है जिस प्रकार
चुंबक लोहे की ओर खिंचा चला जाता है |
2. वह इन वस्तुओं को जरूरत ना होने पर भी खरीदने के लिए विवश होता है |
3. मनुष्य को सभी सामान जरूरी और आरामदायक प्रतीत होता है |
4. बस तुम्हें खरीदने पर उसका  मन संतुष्ट हो जाता है |
5. खरीदने के बाद उसे पता चलता है कि जो चीजें आराम के लिए खरीदी थी वह खलल डालती हैं |
6. उसे खरीदी हुई वस्तुएं अनावश्यक लगती हैं |
7. बहुतायत वस्तुएं खरीदने पर मनुष्य स्वयं को अपराधी महसूस करने लगता है |

प्रश्न 2 - बाजार का बाजारूपन क्या है ? पाठ के आधार पर समझाइए |
               अथवा
बाजारू पन से क्या तात्पर्य है किस प्रकार के व्यक्ति बाजार को सार्थकता प्रदान करते हैं
अथवा बाजार की सार्थकता किसमें है?
उत्तर -
कपट को बढ़ावा देना ही बाजारूपन का अर्थ है | इसके बढ़ने से परस्पर सद्भावना में कमी आ जाती है
इससे मनुष्य आपस में भाई-भाई, मित्र या पड़ोसी नहीं रह जाते | वे आपस में केवल ग्राहक और विक्रेता
की तरह ही व्यवहार करते हैं | इसमें एक की हानि में दूसरे को अपना लाभ दिखाई देता है | बाजारूपन
में शोषण अधिक और आवश्यकताओं का आदान-प्रदान कम होता है |

बाजार की सार्थकता लेखक के विचार में वे ही व्यक्ति बाजार को  सार्थकता प्रदान करते हैं जो
अपनी आवश्यकताओं को ठीक-ठीक समझ कर बाजार का उपयोग करते हैं यदि हम बाजार की चमक
दमक में फस कर रह गए तो वह असंतोष तृष्णा एवं ईर्ष्या से घायल कर बेकार बना डालती है की
सार्थकता भगत जी जैसे लोगों में ही है जिन्हें अपनी आवश्यकताओं का पूर्ण ज्ञान होता है |

प्रश्न 3 - बाजार के बाजार ओपन में बाजार ओपन बाजारू पन में परचेसिंग पावर की भूमिका को
स्पष्ट कीजिए
उत्तर -
परचेसिंग पावर’ का अर्थ है, पैसे की वह पावर जिससे आप कभी भी महंगी-से - महंगी वस्तुएं खरीद
सकते हैं | माल की संस्कृति, सामान्य बाजार और हाट की संस्कृति सभी परचेसिंग पावर से चलते हैं |  
माल की संस्कृति में लगभग सभी प्रकार की वस्तुएं एक ही स्थान पर उनकी कीमत में मिल जाती हैं |
ग्राहक भी धनाढ्य वर्ग के होते हैं | अतः महंगी कीमत पर भी सामान खरीदने को तैयार हो जाते हैं इसलिए
परचेसिंग पावर का असली रूप तो माल में ही दिखाई देता है |

प्रश्न 4 - बाजार दर्शन के आधार पर पैसे की व्यंग शक्ति को सोदाहरण समझाइए |
उत्तर -
पैसे की व्यंग शक्ति का मनुष्य की चेतना पर अवश्य ही कुछ ना कुछ असर पड़ता है जैसे व्यक्ति
सड़क पर चल रहा है और उसके आगे से धूल उड़ाती हुई मोटर निकल जाए तो वह सोचने लगता है काश
मैं भी अमीर मां-बाप के यहां पैदा होता तो मेरे पास भी मोटर गाड़ी होती अतः व्यक्ति पर पैसे की व्यंग
शक्ति का विशेष प्रभाव पड़ता है लेकिन भगत जी जैसे कुछ श्रेष्ठ विद्वानों पर पैसों की व्यंग शक्ति का
बिल्कुल असर नहीं होता |

प्रश्न 5 - लेखक ने अर्थशास्त्र को अनीति शास्त्र क्यों का है उदाहरण देकर समझाइए | 
उत्तर -
बाजार दर्शन पाठ का लेखक ऐसे अर्थशास्त्र को अनीति शास्त्र कहता है, जो बाजार के बाजार
ओपन को कपट को, लोभ-लालच को बढ़ावा देता है | लेखक इसका उदाहरण देते हुए कहते हैं कि कपट
की प्रवृत्ति को बढ़ाने का अर्थ है- परस्पर  सद्भाव की घटना | सद्भाव का ह्रास होने के कारण ही दो भाई
और दोस्त हिरदे पड़ोसी भी आपस में कोरे ग्राहक एवं दुकानदार की तरह व्यवहार करते हैं मानो दोनों एक
दूसरे को ठगने की घात में हूं एक की हानि में दूसरे को अपना लाभ दिखाई देता है | ऐसे बाजार में कपटी
सफल होते हैं और निष्कपट उसका शिकार हो जाते हैं |

प्रश्न 6 - बाजार जाते समय आपको किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए बाजार दर्शन पाठ के
आधार पर उत्तर दीजिए |
उत्तर -
बाजार जाते समय हमें तार्किक एवं बौद्धिक दृष्टिकोण रखना चाहिए अन्यथा अनावश्यक वस्तुओं की
खरीददारी की आशंका रहती है हमें अनावश्यक वस्तुओं की खरीदारी से बचना चाहिए इसके लिए हमें
निम्न बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए-
1. बाजार जाते समय परचेसिंग पावर के प्रति सतर्क रहना चाहिए प्राय पैसे की गर्मी के कारण हम
अनावश्यक वस्तुओं की खरीदारी कर लेते हैं | अतः इससे बचना चाहिए |
2. कई बार बाजार का आकर्षण रूप भी हमें अनावश्यक वस्तुओं को खरीदारी के लिए उत्तेजित करता है |
अतः इसके प्रति सतर्क रहना चाहिए |
3. बाजार जाते समय कभी भी मन को खाली नहीं रखना चाहिए बिना किसी लक्ष्य के बाजार जाने पर प्राय
अनेक वस्तुओं की चाहत हमें घेर लेती है, और इससे बचना चाहिए | अतः हमें खरीदारी के लिए तभी बाजार
जाना चाहिए जब हमें अपनी अवस्थाओं का पूर्ण ज्ञान हो | अन्यथा बाजार के जादू में फंसने की संभावना
बनी रहती है |
4. बाजार जाते समय जरूरत की वस्तुओं की सूची बनाकर अपने साथ लेकर जाएं और उसी दुकान पर
अपना सामान खरीदें |

प्रश्न 7 - बाजारवाद के इस युग में भगत जी जैसा दृष्टिकोण मार्गदर्शन करता है पक्ष और विपक्ष में
तर्क दीजिए |
उत्तर -
समझाने का प्रयत्न किया है कि किस तरह बाजार के जादू से बचा जा सकता है | बाजार में नकारात्मक
प्रभावों को उपभोक्ता भगत जी की तरह बेअसर कर सकता है | भगत जी पर बाजार की चकाचौंध अपना
प्रभाव नहीं डाल सकी | वह खुली आंख, तुष्ट मन और मग्न भाव से चौक बाजार से चले जाते हैं और
एक छोटी सी पंसारी की दुकान से अपनी अवस्था की चीजें केवल जीरा एवं नमक खरीदते हैं | उनके
लिए अपनी आवश्यकताएं बिल्कुल स्पष्ट है | बे बाजार में भटकते नहीं, वह उनके व्यक्तित्व का एक
सशक्त पक्ष है | उनका आचरण निश्चित रूप से बाजार में शांति स्थापित करने में मददगार हो सकता है |
ऐसा आचरण करने वाला व्यक्ति ही बाजार में से सच्चा लाभ उठा सकता है, और बाजार को सच्चा
लाभ दे भी सकता है | संयमित व्यवहार एवं सुस्थिर मानसिकता के बल पर ही आज का मनुष्य बाजार
के शोषण से मुक्त रह सकता है |

प्रश्न 8 - बाजार दर्शन निबंध उपभोक्तावाद एवं बाजारवाद की अंतर्वस्तु को समझने में बेजोड़ है
उदाहरण देकर इस कथन पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए |
उत्तर-
 ‘बाजार दर्शन’ निबंध में उपभोक्तावाद एवं बाजारवाद की अंतर्वस्तु को बेहतर ढंग से स्पष्ट किया
गया है | बाजार में दुकानदार किसी भी प्रकार से अपना सामान अधिक मात्रा में मनचाहे दाम पर बेचना
चाहते हैं | वे ग्राहक की तरह-तरह से लल चाहते हैं | ग्राहक बाजार में अनेक प्रकार की आकर्षण वस्तुएं
देखकर आकृष्ट हो जाते हैं और आवश्यकता ना होने पर भी अनेक वस्तुएं खरीद लेते हैं | लेखक के
शब्द में, ‘’बाजार है कि शैतान का जाल है ? ऐसा सजा सजा कर माल रखते हैं कि बेहया हो जो ना
फंसे’’ | लेखक बाजारवाद को स्पष्ट करते हुए कहता है- उच्च बाजार का आमंत्रण मुख होता है | उससे
चाहे जहां जगती है | जहां मतलब इच्छा यहां इसका अर्थ हुआ अभाव | चौक बाजार में खड़े होकर
आदमी को लगने लगता है उसके पास पर्याप्त चीजें नहीं है | और चाहिए और चाहिए और चाहिए |

प्रश्न 9 - बाजार दर्शन पाठ का संदेश अपने शब्दों में कीजिए |
उत्तर -
बाजार दर्शन पाठ के लेखक जैनेंद्र कुमार ने बाजार की जादुई ताकत से पाठकों को परिचित कराते
हुए उससे सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया है | लेकिन सर आज बाजार की चकाचौंध हमें
अपनी और अत्यधिक आकर्षित करती है, लेकिन लोगों को अपनी आवश्यकतानुसार ही चीजें खरीदनी
चाहिए | लोगों को सोच-समझकर बाजार का उपयोग करना चाहिए | भगत जी के माध्यम से लेखक
ने हमें यह भी बताया- जैनेंद्र जी ने इस महत्वपूर्ण निबंध में गहरी में चाचा रिक्ता एवं साहित्य सुन
ललिता का दुर्लभ संयोग है इस पाठ के माध्यम से जिनेंद्र स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि बाजार की
अनावश्यक चमक-दमक में फंसने से असंतोष तृष्णा ईर्ष्या का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है |
और इस पाठ से उन्होंने यह संदेश इस संदेश को उन्होंने कहीं दार्शनिक अंदाज से व्यक्त किया |

प्रश्न 10 -  बाजार दर्शन पाठ के आधार पर बताइए कि पैसे की पावर का रस किन दो रूपों
में प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर -
पैसे की पावर का असली रस ‘ परचेसिंग पावर’  में है | पैसे की पावर से खरीदे गए मकान संपत्ति
दूर से ही दिखाई पड़ते हैं | दूसरे, संयमी लोग पैसे की बचत करके पैसे की पावर का रस प्राप्त कर
लेते हैं | पैसा इकट्ठा होने पर हम आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग भी कर सकते हैं और हमें
किसी से मदद मांगने की भी जरूरत नहीं पड़ती |

शुभकामनाओं सहित !

नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |

1 comment:

Anonymous said...

Thank you mam