Saturday, May 9, 2020

Aroh Chapter 5 Poetry आरोह पांचवा अध्याय काव्य भाग

विद्यार्थियों


आज हम आरोह पुस्तिका का चतुर्थ अध्याय करेंगे - सहर्ष स्वीकारा है
(कवि - गजानन माधव मुक्तिबोध)


                                              कविता का सार


गजानन माधव मुक्तिबोध नई कविता के प्रमुख कवि हैं | “सहर्ष स्वीकारा है” यह कविता छायावादी
चेतना से प्रेरित है | कवि ने जीवन में मनुष्य को सुख- दुख, राग- विराग, हर्ष- विषाद, आशा- निराशा,
संघर्ष- अवसाद, उठा- पटक आदि भावों को सहर्ष अंगीकार करने की प्रेरणा प्रदान की है | इसके साथ
ही कविता उस विशिष्ट व्यक्ति या सत्ता की ओर संकेत करती है, जिस से कवि को प्रेरणा प्राप्त हुई है | 
कभी अपने प्रिय से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है | मैं स्वयं को जितना भी उड़ता है ,उतना ही फिर-फिर
भर आता है मानो उसके भीतर कोई झरना है | उसे लगता है कि उसका प्रिय उस पर चांद की तरह खिला
रहता है |

कभी चाहता है कि वह अपने प्रिय के अत्यधिक प्रेम से उसकी ममता के मुंह से उभरे वह सदा ही उसकी
आत्मीयता के उजाले में रहते- रहते कमजोर हो गया है |  उसे भय लगता है कि वह उसके बिना शायद 
जी नहीं पाएगा | इसलिए वह उसे भूल जाना चाहता है, ताकि वह अंधेरों में गहरी से गहरी गुफाओं में भी
जी सके | यद्यपि उसका प्रिय को भूलना एक दंड होगा, फिर भी मैं दंड को झेलना चाहता है | उसे
विश्वास है कि वह अंधेरे  लड़ता हुआ भी उसकी आत्मीयता से शक्ति पाएगा | उसका सहारा उसे सब
जगह मिलता रहेगा | उसने जीवन में आज तक जो भी पाया है | वह सब उसके प्रिय की ही देन है |
उसके सब कार्यों में “कारण” रूप से उसका प्रिया ही रहा है |

प्रश्न 1 - सहर्ष स्वीकारा है कविता में कवि ने किसे सहर्ष स्वीकारा है तथा आगे चलकर उसी को
क्यों बुला देना चाहता है स्पष्ट कीजिए?
उत्तर -
कवि ने अपने प्रिय से जुड़ी प्रत्येक स्थिति को सहर्ष स्वीकार किया है और आगे चलकर अपनी प्रिय को
ही भुला देना चाहता है | इसका कारण यह है कि उसका अज्ञात प्रिय उसके जीवन पर है | पूर्णता छा
गया है जिससे वह कमजोर पड़ने लगा है | अब वह अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है | अपनी प्रिय
की छाया के कारण अक्षम नहीं बनना चाहता हालांकि यह जानना है, कि उस कार्य में भी उसके प्रिय
उसके साथ ही होगी |

प्रश्न 2 - बहलाती  सहलाती आत्मीयता बर्दाश्त नहीं होती “और कविता के शीर्षक सहर्ष स्वीकारा
है” मैं आप कैसा अंतर्विरोध पाते हैं स्पष्ट कीजिए?
उत्तर - 
प्रस्तुत दोनों बातों में गहरा अंतर्विरोध है | एक और तो कभी सब कुछ शहर से स्वीकार करता है, तो दो
वहीं दूसरी और उसको बहलाती सहलाती आत्मीयता असहनीय है | वास्तविकता तो यह है कि अत्यधिक
आत्मीयता के कारण कभी अपनी क्षमताओं एवं संभावनाओं का पूर्ण विकास नहीं कर पा रहा है | इसलिए
मैं अपने स्वतंत्र अस्तित्व के लिए छटपटा रहा है, और इस छटपटाहट में वह गहन अंधकार को भी स्वीकार
करने को तैयार है |इसी संदर्भ में कवि ने सहर्ष स्वीकार है कहा है |

प्रश्न 3 - सहर्ष स्वीकारा है कविता में कवि को दिल में झरना होने का आभास क्यों होता है?
उत्तर - 
जिस तरह झरने में जल का प्रवाह निरंतर होता रहता है | कभी थमता नहीं इसी प्रकार कवि के मन में
भावनाएं निरंतर उन्नति रहती है, इसलिए कभी को लगता है कि उसका दिल एक झरने की तरह है | कवि
कमान भावनाओं का असीम भंडार है | मैं उन्हें जितना व्यक्त करता है उतना ही वह अनुभव करता है |
उसका हृदय भावनाओं में वैसे ही भरा हुए कवि की संवेदनाएं और भावनाएं अपने प्रिय के प्रति और
सीमित है |

प्रश्न 4 - “सहर्ष स्वीकारा है”  नामक कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए?
उत्तर -
सहर्ष स्वीकारा है” कविता मुक्तिबोध की एक सशक्त कविता है इसमें कवि ने अपने जीवन के समस्त
खट्टे मीठे अनुभवों कोमल कठोर अनुभूतियों तथा सुख -दुख की स्थितियों को सहर्ष स्वीकारा है | मैं अपने
किसी भी क्षण को अपने प्रिय से न केवल अत्यंत जुड़ा हुआ पाता है | अपितु हर स्थिति , परिस्थिति को उसी
की देन मानता है उसका समस्त जीवन अपने प्रिय की संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है | उसके भीतर जो प्रेम का
प्रवाह है वह भी उसके प्रिया की ही देन है | परंतु कवि का भविष्य अंधकार में है इसलिए मैं प्रिया के प्रेम
को निभा पाने में स्वयं को अक्षम मानता है अतः वह इसका दंड भी भुगतना चाहता है | वह अंधेरी गुफाओं
में निर्वाचन का दंड भोगना चाहता है | उसे विश्वास है कि वहां भी उसे अपने प्रिया की यादों का सहारा
मिलेगा | चाहे दुख हो या सुख हर स्थिति में वैसे हमको अपने प्रिय से जुड़ा हुआ पाता है |

प्रश्न 5 - कवि ने गरीबी को गरबीली गरीबी क्यों कहा है ? 
उत्तर -
कवि ने गरीबी को  गरबीली इसलिए कहा है, क्योंकि गरीबी का जीवन व्यतीत करते हुए भी उसका
आत्मसम्मान काम नहीं हुआ है | गरीब होने पर भी उसे हीन भावना नहीं आई है | उसे अपनी गरीबी पर
गर्व है इसलिए वे अपने स्वाभिमान को आत्म सम्मान को बचाए हुए हैं |

प्रश्न 6 - पाताली अंधेरे में तथा गुफाओं और धुएँ के बादलों में कवि बिल्कुल लापता हो जाने में भी
संतोष का अनुभव क्यों करता है ?
उत्तर -
सहर्ष स्वीकारा है” कविता में कवि पाताली अंधेरों में तथा गुफाओं और धुए के बादलों में बिल्कुल लापता
हो जाने में भी संतोष का अनुभव इसलिए करता है | क्योंकि उसे विश्वास है कि वहां भी उसे अपने प्रिय का
सहारा होगा |  वह अपने नारकीय दिन अपने प्रिय के सहारे जी लेगा | उसे अपने कृतज्ञता भाव से भी मुक्ति
मिलेगी | कवि पाताल की अंधेरी गुफाओं और गड्ढों में अदृश्य हो जाना चाहता | क्योंकि  वह धुए के बादलों
में पूर्ण रूप से छिप जाना चाहता है जिससे उसके विशिष्ट प्रिय अतिरिक्त कोई अन्य उसे पहचान ना सके |

प्रश्न 7 - ममता के बाद की मंडराती कोमलता भीतर फिर आती है भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए | 
उत्तर -
प्रस्तुत गजानन माधव मुक्तिबोध द्वारा रचित सहर्ष स्वीकारा है नामक कविता से अवतरित हैं | कवि अपने
विशिष्ट प्रिय को संबोधन कर रहा है, कि अब उसके जीवन का वह पड़ाव आ चुका है | जो ममता रूपी
कोमलता कभी उसके हृदय को स्पर्श करते ही आनंद विभोर कर देती थी जिसमें डूबकर वह आनंद मग्न
हो सब कुछ विस्मृत कर देता था | अब वह भी उसे सहन नहीं होती | वह उसके हृदय को आनंद की अपेक्षा
पीड़ा पहुंचाती है | वह उसे बादलों के मंडराने के समान कठोर प्रतीत होती है |


शुभकामनाओं सहित !

नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |

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