Monday, May 4, 2020

Aroh Chapter 4 Poetry आरोह चतुर्थ अध्याय काव्य भाग

विद्यार्थियों


आज हम आरोह पुस्तिका का चतुर्थ अध्याय करेंगे - कैमरे में बंद अपाहिज (कवि -  रघुवीर सहाय)


                                              कविता का सार


कैमरे में बंद अपाहिज कविता दूरदर्शन - कर्मियों की संवेदनहीनता और क्रूरता पर प्रकाश डाला गया है |
प्राय: मीडिया में कार्यक्रम की आकर्षक और बिकाऊ बनाने के लिए मानवीय दुख - दर्द  को खोल कर
दिखाया जाता है | अपाहिजओं को कैमरे के सामने लाकर उनसे बड़े क्रूर प्रश्न पूछे जाते हैं | उनके सोए
हुए दर्द को जानबूझकर ताजा किया जाता है | मीडिया की कोशिश होती है कि अपाहिज व्यक्ति अपने
दर्द से और दर्शक करुणा से रो पड़े | इस प्रकार उनका कार्यक्रम रोचक बन जाए कवि ने मीडिया की
इस व्यवसायिक क्रूरता पर गहरा कटाक्ष किया है | 


एक सफल कार्यक्रम बनाने के लिए समाज के समर्थ शक्तिशाली लोग दूरदर्शन पर बोलेंगे | दूरदर्शन के
बंद स्टूडियो में एक अपाहिज को लाया जाएगा और उसके अपाहिज पन पर सवाल पूछ कर दर्शकों में
संवेदना उत्पन्न की जाएगी | वहीं से पूछा जाएगा - क्या आप अपाहिज है? आप क्यों अपाहिज हैं? क्या
आपका अपाहिज पर आपको दुख देता है? आपका दुख क्या है? जब अपाहिज अपना दुख नहीं बता
पाएगा, तो कार्यक्रम को प्रस्तुतकर्ता खुद इशारा करके उसे बताएगा कि उसे अपाहिज होकर कैसा लगेगा |

कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए उसे सवाल पूछ- पूछ कर रुला दिया जाएगा | ऐसे सवालों से दर्शकों
में संवेदना और करुणा उत्पन्न होगी जब अपाहिज पूछे गए सवालों से आहत होकर रोने लगेगा तो उसकी
फूली हुई आंखों और होठों से दबी पीड़ा को कैमरे पर बड़ा करके दिखाया जाएगा | क्योंकि यही तो उसके
अपाहिजपन की पीड़ा है, जो दर्शकों को दिखाई देगी | फिर समाज के समर्थक शक्तिशाली लोग जो
कार्यक्रम को और अधिक रोचक व संवेदना पूरक बनाना चाहते हैं | इस बात का प्रयास करेंगे कि स्टूडियो
में लाया गया पानी और दर्शक एक साथ रहें यदि ऐसा नहीं हुआ तो कैमरा बंद करके कार्यक्रम को समाप्त
कर दिया जाएगा | क्योंकि समय की कीमत है , दूरदर्शन के पर्दे की कीमत है और इतना कीमती वक्त
संवेदना पीड़ा दुख जैसी छोटी और तुच्छ चीजों पर बर्बाद नहीं किया जा सकता  कार्यक्रम की समाप्ति
पर समर्थ, शक्तिवान लोग मुस्कुराकर दर्शकों को बताएंगे कि यह  एक सामाजिक उद्देश्य से युक्त
कार्यक्रम था |

प्रश्न 1 - सिद्ध कीजिए कि कैमरे में बंद अपाहिज करुणा के मुखोटे में छुपी करुणा / क्रूरता की
कविता है ?
                                              अथवा
कैमरे में बंद अपाहिज कविता कुछ लोगों की संवेदनहीनता प्रकट करती है कैसे ?
उत्तर - 
कैमरे में बंद अपाहिज” कार्यक्रम करुणा दिखाने के लिए बनाया जा रहा है | किंतु इसमें करुणा का
बनावटी मुखौटा है,  जो की क्रूरता से भरा हुआ है | उद्देश्य अपने चैनल के लिए एक बिकाऊ कार्यक्रम
बनाना है | अपाहिज से जो बेहूदा प्रश्न पूछे गए हैं, उसमें करुणा नहीं क्रूरता है | यथा -
  • आप क्या अपाहिज हैं ?
  • क्यों अपाहिज हैं ?
  • पाहिज पन दुख देता होगा ?
  • दुख क्या है ?
  • अपाहिज होकर कैसा लगता है ?
इन प्रश्नों में कहीं भी करुणा का भाग नहीं है | अपाहिज से कहा जा रहा है, कि कोशिश कीजिए |
अन्यथा इस अवसर को आप खो देंगे, मानो इस अवसर को पाकर उसका अपाहिजपन दूर हो जाएगा |
अपने स्वार्थ के लिए अपने कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए किसी अपाहिज का मजाक बनाया जा
रहा है | बार-बार एक ही प्रश्न को पूछ कर अलग अलग ढंग से पूछ कर उस पर उस पर मानसिक दबाव
बनाते हैं |

प्रश्न 2 - हम समर्थ शक्तिमान और एक हम एक दुर्बल को लाएंगे पंक्ति के माध्यम से कवि ने क्या
व्यंग्य किया है ?
उत्तर -
हम समर्थ शक्तिमान में व्यंग है कि मीडिया वाले स्वयं को बहुत शक्तिशाली मानने लगे हैं | वे स्वयं को
दूसरों का भाग्य विधाता मानने लगे हैं , जिसे चाहे दूरदर्शन पर लाकर उठा दे जिसे चाहे नीचा गिरा दे
यहां समर्थ शक्तिमान का एक अन्य अर्थ यह भी है कि सामान्य व्यक्ति जो कि अपंग नहीं है | वह अपगों
की तुलना में अधिक समर्थ होता है | दुर्बल को लाएंगे | मैं दया, लाचारी और प्रदर्शन का भाव है | इससे
यह ध्वनित होता है कि मीडिया वाले किसी अपाहिज को सबके सामने उसका तमाशा बनाने के लिए उस
पर टीका टिप्पणी करने के लिए, विशेषण करने के लिए तथा उसका मजाक बनाने के लिए लाएंगे | मानो
शक्तिशालीओं के बीच दुर्बल का खड़ा करना कोई तमाशा या खेल हो |

प्रश्न 3 - “कैमरे में बंद अपाहिज कविता” के आधार पर सिद्ध कीजिए की कविता संवेदनहीन सूचना
प्रसारण तंत्र पर एक व्यंग है?
उत्तर -
कैमरे में बंद अपाहिज कविता” संवेदनहीन सूचना प्रसारण तंत्र पर एक गहरा व्यंग्य है | सामाजिक
कार्यक्रम के नाम पर किसी अपाहिज की पीड़ा को जनसंचार माध्यमों के द्वारा आम जनता तक पहुंचाने
वाला व्यक्ति उसके दुख दर्द को बेचने का काम कर रहा है | उसमें ना  तो अपाहिजओं के प्रति वास्तविक
संवेदना है और ना उसके मान सम्मान के प्रति चिंता | उसका उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना है | उसके द्वारा
पूछे जाने वाले प्रश्न बेहद अपमानजनक होते हैं, जो प्रसारण तंत्र की संवेदनहीनता को ही उजागर करते हैं |
वास्तव में मीडिया (दूरदर्शन) द्वारा एक अपाहिज व्यक्ति का साक्षात्कार लेने का उद्देश्य सामाजिक कार्यक्रम
के नाम पर व्यक्ति की दीनता एवं बेबसी को बेचकर अपने दर्शकों की संख्या में वृद्धि करके पैसा कमाना है |

शुभकामनाओं सहित !

नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |

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