Sunday, May 31, 2020

Aroh Chapter 5 Literature आरोह पांचवा अध्याय गद्य भाग

विद्यार्थियों!

आज हम आरोह पुस्तिका का पांचवा अध्याय
गद्य भाग -
चार्ली चैपलिन यानी हम सब (लेखक: विष्णु खरे) करेंगे |


प्रश्न 1 - लेखक ने ऐसा क्यों कहा कि अभी चैपली पर करीब 50 वर्षों तक काफी कुछ
कहा जाएगा ?
उत्तर -
चार्ली चैप्लिन यानी हम सब में लेखक विष्णु खरे जी ने चार्ली के विषय में यह कहा है कि
उस पर अभी अगले 50 वर्षो तक काफी कुछ कहा जाएगा | और उसके कथन के तीन कारण है | 
- अभी चार्ली की कुछ ऐसी  रीले मिली हैं | जिनके बारे में अब तक कोई कुछ नहीं जानता था |
अतः इन सब रीलो पर भी चर्चा होगी | 
- चार्ली ने भारतीय जनजीवन पर जो प्रभाव छोड़ा है | उसका भी ठीक से मूल्यांकन नहीं हुआ है |
समय, भूगोल और संस्कृतियों से खिलवाड़ करता हुआ | चार्ली आज भी भारत के लाखों बच्चों
को हसा  रहा है, जो उसे अपने बुढ़ापे तक याद रखेंगे | 

- चार्ली की फिल्मों का प्रभाव अभी भी आने वाले 50 सालों तक शेष रहेगा उसकी लोकप्रियता
और चर्चा अभी जीवित है | उसकी है कला पूरी दुनिया के सामने हैं, जो 75 वर्षों से पांच पीढ़ियों
को मंत्र मुग्ध कर चुकी है |

प्रश्न 2 - चार्ली ने न सिर्फ फिल्म- कला को लोकतांत्रिक बनाया बल्कि दर्शकों की वर्ग
तथा वर्ण - व्यवस्था को तोड़ा इस पंक्ति में लोकतांत्रिक बनाने का और वर्ण - व्यवस्था तोड़ने
का क्या अभिप्राय है ? आप इससे कहां तक सहमत हैं?
उत्तर -
लोकतांत्रिक बनाने का आशय है - फिल्म-कला कुछ सभी के लिए लोकप्रिय बनाना और
वर्ण-व्यवस्था तोड़ने का  आशय है | समाज में प्रचलित रंग, जाति आदि भेदभाव को समाप्त करना | 
उन्होंने फिल्म कला को बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों तक पहुंचाने में अपना योगदान दिया है |
हम इस से पूर्ण तरह सहमत हैं क्योंकि उनकी फिल्मों के समय भूगोल संस्कृतियों की सीमाओं को
लांग कर सार्वभौमिक लोकप्रियता अर्जित की | उन्होंने लोगों को अपने ऊपर तथा शासकीय तंत्र
पर हंसना सिखाया | चार्ली ने यह सिद्ध कर दिया कि कला स्वतंत्र होती है, वह किसी प्रकार की
सीमाओं में नहीं बंधती |

प्रश्न 3 - लेखक ने चार्ली का भारतीयकरण किसे कहा और क्यों? गांधी और नेहरू ने
भी उनका सानिध्य क्यों चाहा? 
उत्तर -
लेखक ने राज कपूर द्वारा बनाई गई आवारा नामक फिल्म को चार्ली का भारतीय करण कहा
राज कपूर ने आवारा और श्री 420 में नायकों को अपने पर ही  हंसाया उसके बाद भारतीय फिल्मों
में यह परंपरा ही चल निकली | दिलीप कुमार, देवानंद, शम्मी कपूर, अमिताभ बच्चन तथा श्रीदेवी
ने चार्ली का अनुकरण करके स्वयं पर हंसने की परंपरा को आगे बढ़ाया | 
गांधी भी कभी-कभी चार्ली की तरह अपने पर हंसते थे  लेखक ने लिखा है कि महात्मा गांधी में
चार्ली  चैपलिन का खासा पुट था नेहरू और गांधी चार्ली चैपलिन के साथ रहकर प्रसन्न होते थे
कारण वे स्वयं पर हंसने की इस कला पर मुग्ध थे |

प्रश्न 4 - जीवन संघर्षों ने चार्ली चैपलिन के व्यक्तित्व को कैसे निकाला है?
उत्तर -
चार्ली एक परित्यक्ता अर्थात तलाकशुदा, दूसरे दर्जे की स्टेज अभिनेत्री के बेटे थे | उन्होंने भयंकर
गरीबी और मां के पागलपन के कारण जीवन में संघर्ष करना सीख लिया था | उन्होंने साम्राज्यवादी,
पूंजीवादी तथा सामंत शाही घमंडी समाज का तिरस्कार सहन किया था | इसी कारण चार्ली ने
करोड़पति हो जाने के बाद भी अंत तक अपने पुराने जीवन मूल्यों को ही अपनाए रखा | इन
परिस्थितियों में चार्ली ने भीड़ में यह बताया कि राजा भी उतना ही नंगा है, जितना कि वह | यही
वह कलाकार है जिसने विषम परिस्थितियों में भी हिम्मत से काम लिया |

प्रश्न 5 - चार्ली चैपलिन की फिल्मों में निहित प्राप्ति / करुणा / हास्य का सामान्य भारतीय
कला और सौंदर्य शास्त्र की परिधि में क्यों नहीं आता ?
उत्तर -
भारतीय फिल्मों में त्रासदी, करुणा, हास्य सब है पर तीनों को एक साथ आना कभी प्रचलन में
हीं रहा | करुणा और हास्य का मिश्रित हो जाना या करुणा का हादसे में बदल जाना, भारतीय
फिल्म कला का सिद्धांत नहीं बन पाया | चार्ली चैपलिन की फिल्मों में त्रासदी, करुणा एवं हास्य
का सामान्य से मिलता है भारत में यह स्थिति रस सिद्धांत के अनुकूल नहीं है |  भारतीयों का
स्वभाव दुख में हंसना ,हंसी में करुणा देखने का नहीं है | अतः चार्ली की फिल्मों में निहित त्रासदी,
करुणा व हास्य का सामंजस्य भारतीय कला और सौंदर्यशास्त्र की परिधि में नहीं आता |



प्रश्न 6 - चार्ली की फिल्में भावनाओं पर टिकी हुई है, बुद्धि पर नहीं चार्ली चैप्लिन यानी
हम सब पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए?
                                    अथवा
बचपन की किन दो घटनाओं का चार्ली पर गहरा प्रभाव पड़ा था? 
उत्तर -
चार्ली की फिल्मों में बुद्धि का नहीं, भावना का अधिक महत्व है | कारण यह है कि उसे बचपन
से ही करुणा और हास्य ने जबरदस्त प्रभावित किया था | बचपन में एक समय चार्ली बीमार पड़ा |
तब उसकी मां ने उसे बाइबिल पढ़कर सुनाई | जब ईसा के सूली पर चढ़ने का दृश्य आया, तो
चार्ली और उसकी मां द्रवित होकर रोने लगे | इससे चार्ली ने करुणा को जाना | 

चाली के घर के पास ही एक कसाई खाना था | वहां रोज  भेड़े लाई जाती थी | एक दिन एक भेड़
किसी तरह वहां से भाग निकली | उसे पकड़ने वाला आदमी इसके पीछे दौड़ते हुए कई बार
फिसला और गिरा | सब लोग सड़क पर ठहाके लगाने लगे | चार्ली को भी उस पर हंसी आई |
परंतु जब भेड़ पकड़ी गई तो चार्ली का मन रो पड़ा | उसे लगा कि वह बेचारी अब मारी जाएगी |
इस करुण अनुभव ने भी उसके हृदय को संस्कारित किया |


शुभकामनाओं सहित !

नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |

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