विद्यार्थियों
आज हम आरोह पुस्तिका का 6 अध्याय करेंगे - उषा (कवि - शमशेर बहादुर सिंह)
कविता का सार
शमशेर सिंह बहादुर द्वारा रचित कविता “उषा” में सूर्य उदय से पूर्व की प्रतिक्षण परिवर्तित होती
प्रकृति का शाब्दिक चित्र प्रस्तुत किया गया है | कवि ने भोर को आसमानी गति को गांव के हलचल
भरे जीवन से जुड़ा है | सूर्योदय से पहले भोर में आकाश एकदम नीला था | नीले शंख जैसे आकाश
पर सफेदी फैली हुई थी | आकाश राख से लीपा हुआ चौका प्रतीत हो रहा था, जो अभी तक सूखा
नहीं है | सूर्य की प्रथम किरण प्रकट हुई उसकी लालिमा ने नील आकाश को ऐसे चमका दिया,
मानो किसी ने काली सिल पर केसर पीस कर धो दी हो या काली स्लेट पर किसी ने लाल खड़िया
मिट्टी मल दी हो | नीलगगन रूपी नीले जल में उदय होते सूर्य की किरणें ऐसे प्रतीत हो रही है, मानो
कोई सुंदरी नीले जल में नहाकर बाहर निकलते हुए अपने शरीर की आभा बिखेर रही हो | भोर कालीन
उषा का यह सौंदर्य और आकर्षण समाप्त हो रहा है, क्योंकि सूर्य उदय हो रहा है |
प्रश्न 1 - कविता के किन उपमानो को देखकर यह कहा जा सकता है की उषा कविता गांव की
सुबह का गतिशील शब्द चित्र है?
उत्तर -
उषा कविता में कवि शमशेर बहादुर सिंह ने ग्रामीण उपमान ओं का प्रयोग कर गांव की सुबह के
गतिशील शब्द चित्र को सामने लाने का प्रयास किया है | कविता में नीले रंग के प्रातः कालीन
आकाश को राख से लिखा हुआ चौका कहा है ग्रामीण परिवेश में ही गृहणी भोजन बनाने के बाद
चौके चूल्हे को राख से लेपती है | जो प्राय काफी समय तक गीला ही रहता है | दूसरा बिंब काले
सिल का है | काला अर्थात पत्थर के काले टुकड़े पर केसर पीसने का काम भी गांव की महिलाएं
ही करती हैं | तीसरा बिंब काले सलेट पर लाल खड़िया चौक से लिखने वाली क्रिया, नन्हे ग्रामीण
बालकों द्वारा की जाती है | इन बिंबआत्मक चेतनाओं में गतिशील शब्द- चित्र भी मौजूद है गतिशीलता
इस अर्थ में भी है कि तीनों शब्द-चित्र स्थिर न होकर ,किसी-न-किसी क्रिया के अभी-अभी समाप्त
होने के सूचक हैं |
प्रश्न 2- अभी गिला पड़ा है उषा कविता के आधार पर पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर -
अभी गिला पड़ा है पंक्ति का भाव यह है कि सूर्य उदय से पहले के आकाश में नमी होती है |
ऐसा आभास होता है कि शाम को भोजन बनाने के बाद किसी ग्रहणी ने अपने चूल्हे को राख से
लीपा हो, जो अब तक गिला है | ऐसा प्रतीत होता है अतः भाव यह है कि भोर के नभ में सजलता का
गुण विद्यमान है |
प्रश्न 3 - कवि ने सूर्योदय से पहले अकाश की भंगिमा में आए परिवर्तनों को किस रूप में देखा है?
उषा पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए |
उत्तर -
कवि ने प्रस्तुत कविता में प्रातः कालीन आकाश में होने वाले सूर्य उदय में का गतिशील चित्र प्रस्तुत
किया है | कवि आकाश में हो रहे परिवर्तनों को ग्रामीण उपमानो के द्वारा प्रस्तुत करता हुआ, गतिशील
शब्द-चित्र उपस्थित करता है | अंधकार के समाप्त होने पर भोर के नभ के नीले रंग में वैसे ही नमी होती
है, जैसे रात में लीपा हुआ चौका अभी तक गीला हो | कालीमां के छटने पर क्षितिज की लालिमा ऐसी
लगती है, मानो किसी काली सिल यानी पत्थर पर लाल केसर का लेप लगा दिया गया है | इस प्रकार
सूर्य उदय से पहले का आकाश परिवर्तित हो रहा है |
प्रश्न 4 - “जादू टूटता है” इस उषा का ,अब उषा का जादू क्या है? वह कैसे टूटता है ?
उत्तर -
सूर्य उदय होने से पहले आकाश में नए-नए रंग उभरते हैं | लाल- काले रंगों के अद्भुत मेल से आकाश में
जादू जैसा वातावरण बन जाता है | इसी रंग बिरंगे वातावरण को उषा का जादू कहा गया है | सूर्य उदय
होने पर वे सारे रंग विलीन हो जाते हैं और उषा का जादू जो है टूट जाता है |
शुभकामनाओं सहित !
नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
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