विद्यार्थियों!
आज हम आरोह पुस्तिका का छटा अध्याय गद्य भाग -
नमक (लेखक: रजिया सज्जाद जहीर) करेंगे |
प्रश्न 1 - सफिया के भाई ने नमक की पुड़िया ले जाने से क्यों मना कर दिया ?
उत्तर -
सफिया के भाई ने नमक की पुड़िया ले जाने से इसलिए मना कर दिया | क्योंकि नमक पाकिस्तान
से सरहद पार हिंदुस्तान ले जाना गैरकानूनी था | भारत में नमक की कोई कमी नहीं है | अतः उन्हें
पाकिस्तानी नमक ले जाने की कोई जरूरत नहीं है | कस्टम अधिकारी नमक पाए जाने पर उनके
सामान की चिंदी चिंदी कर डालेंगे और पकड़े जाने पर अपमान भी होगा |
प्रश्न 2 - नमक की पुड़िया ले जाने के संबंध में सफिया के मन में क्या द्वंद था?
उत्तर -
सफिया को सुबह ही पाकिस्तान से रवाना होना था, इसलिए उसे रात को सामान की पैकिंग करनी
थी | सारी चीजें समेट कर सूटकेस और बिस्तर बंद में बांध दी गई | केवल किन्नू की एक टोकरी तथा
नमक की पुड़िया रह गई थी | वह सोच रही थी, कि नमक की पुड़िया को कैसे लेकर जाए सोच रही थी |
अगर उसे हाथ में लेकर गई कस्टम वालों के सामने सबसे पहले इसी को रख दें, लेकिन अगर कस्टम
वालों ने नहीं जाने दिया तो मजबूरी में हम छोड़ देंगे | लेकिन फिर उस वायदे का क्या होगा, जो हमने
अपनी मां से किया वायदा जान देकर भी पूरा करना होगा | सोचने लगी दूसरे क्षण में सोचने लगी,
कि फलों की टोकरी तो आते समय भी किसी की नहीं देखी जा रही थी | हिंदुस्तान से केले पाकिस्तान से
किन्नू सब ऐसे लेकर जा रहे थे | बस यही द्वंद उसके मन में चल रहा था |
प्रश्न 3 - जब सफिया अमृतसर पुल पर चल रही थी तो कस्टम अधिकारी निचली सिर झुकाए
चुपचाप क्यों खड़े थे ?
उत्तर -
भारतीय कस्टम अधिकारी जो बंगाली था, वह सफिया की मानवीयता, भावना और संवेदना से
अत्यंत प्रभावित हुआ | वह एक नेक व्यक्ति था | मैं सखियां की इमानदारी, स्पष्ट वादित और
वायदा निभाने की कटिबद्धता के सामने नतमस्तक था | उसे सफिया के व्यवहार तथा उसकी
भावनाओं पर गर्व अनुभव हो रहा था | मैं सिर झुका कर सफिया के प्रति सम्मान व्यक्त करना
चाहता था |
प्रश्न 4 - नमक ले जाने के बारे में सफिया के मन में उठे द्वंदो के आधार पर उसकी चारित्रिक
विशेषताओं को स्पष्ट करें ?
उत्तर -
सफिया अपनी सिख मां के लिए पाकिस्तानी लाहौरी नमक ले जाकर अपना वायदा पूरा करना चाहती
थी | परंतु जब उसे ज्ञात हुआ कि कस्टम नियम के अनुसार नमक ले जाना वर्जित है, तो उसके मन
में द्वंद चलने लगा | इस द्वंद के आधार पर हम कह सकते कि सफिया एक भावुक, ईमानदार, दृढ़ निश्चय,
निडर और वचन को निभाने वाली स्त्री थी | वह स्पष्ट वादी भी थी | उसे नमक की पुड़िया कस्टम अधिकारी
को दिखा सब कुछ स्पष्ट बता दिया | उसने मानवीय संवेदना के धार पर अपना कर्तव्य निभाया | वह एक
संवेदनशील, मानवता से भरपूर स्त्री थी |
प्रश्न 5 - लाहौर अभी तक उनका वतन है और देहली मेरा या मेरा वतन ढाका है जैसे उदगार
किस सामाजिक यथार्थ का संकेत करते हैं ?
उत्तर -
पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी कहता है, और अभी तक उनका वतन है | और दिल्ली मेरा सुनील दत्त
गुप्ता जो कि कस्टम अधिकारी है, मेरा वतन ढाका है | यह तथा सामाजिक यथार्थ को स्पष्ट करते हैं,
कि देश की सीमाएं मनुष्य के मनों को विभाजित नहीं कर सकती | मनुष्य का लगाव अपनी जन्मभूमि से
नहीं टूट सकता | सब देश प्रेम कोई गमले में उगाए जाने वाला पौधा नहीं है, जिससे मनमर्जी से कहीं भी
उगाया जा सके | हर मनुष्य को संभावित रूप से अपनी जन्मभूमि से प्रेम होता है, जो कि अंतिम समय तक
रहता है | अतः भारत-पाकिस्तान आदि के विभाजन और स्वभाविक हैं, कृत्रिम है | राष्ट्र राज्यों की सीमाओं
ने लोगों को उनके जन्म स्थानों से तो विस्थापित कर दिया, पर वह उनके दिलों को नहीं बांट पाई |
प्रश्न 6 - मानचित्र पर एक लकीर खींच देने से जमीन और जनता बंट नहीं जाती उचित तक
ओवर उदाहरणों के जरिए इसकी पुष्टि करें ?
अथवा
सीमाएं बैठ जाने से दिल नहीं बटा करते नमक कहानी में इस बात को किस तरह सिद्ध किया गया है ?
उत्तर -
मजहबी व राजनीतिक आधार पर देश विभाजित कर दिए जा सकते हैं, परंतु मानचित्र पर एक लकीर
खींच देने से जमीन और जनता विभाजित नहीं हो जाती | भारत का दो बार विभाजन हुआ - भारत और
पाकिस्तान में तथा भारत और बांग्लादेश में, लेकिन लोगों ने इसे हृदय से स्वीकार नहीं किया | उनके सगे -
संबंधी दोनों देशों में है वह आज भी एक दूसरे से मिलते हैं | सौगातो का आदान प्रदान करते हैं | दिल्ली से
विस्थापित होकर जाने वाला व्यक्ति आज भी दिल्ली को अपना वतन मानता है, और पाकिस्तान के लाहौर
से विस्थापित हुआ अमृतसर में रहने वाला अभी लाहौर को अपना वतन मानता है |
प्रश्न 7 - नमक कहानी में भारत व पाक को जनता के आरोपित भेदभाव के बीच मोहब्बत का
नमकीन स्वाद भुला हुआ है कैसे ?
उत्तर -
आरोपित भेदभाव है कि भारत- पाकिस्तान 2 अलग अलग देश हैं | सफिया के भाई के व्यवहार में यह
भेदभाव स्पष्ट दिखाई देता है | इस आरोपित भेदभाव के बाद भी सिख बीबी और सफिया, सफिया
और पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी, सुनील दास गुप्ता एवं सफिया के व्यवहार में जो स्नेह सम्मान है,
उससे प्रकट होता है कि दोनों देशों की जनता के बीच मोहब्बत का नमकीन स्वाद भी है | यह स्वाद
इस कहानी में भी घुला हुआ है |
प्रश्न 8 - नमक कहानी की मूल संवेदना पर अपने विचार व्यक्त कीजिए?
अथवा
नमक कहानी क्या संदेश छिपा हुआ है ? स्पष्ट कीजिए
उत्तर -
भारत और पाकिस्तान लगभग पिछले 65 वर्ष सत्ता लोलुप राजनेताओं और मजहबी कट्टरपंथी धार्मिक
के दुराग्रह के कारण संघर्ष करते रहे हैं | कहानी है बताती है, कि विभाजन यह दुश्मनी सामान्य जनता के
हृदय में नहीं है | यह कटु सत्य है कि सामान्य जनता धर्म या क्षेत्र के आधार पर विभाजन या संघर्ष को
ह्रदय के स्तर पर स्वीकार नहीं करती | तभी तो भारत की सिख बीबी लाहौर का नमक ही सौगात में
चाहती है | पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी दिल्ली को अपना वतन बताता है, और जामा मस्जिद की
सीढ़ियों को सलाम कहता है, और भारतीय खातून का संदेश भेजता है-- लाहौर अभी तक उनका वतन
है, और दिल्ली मेरा तो बाकी सब रफ्ता रफ्ता ठीक हो जाएगा | भारतीय कस्टम अधिकारी सुनील
दास गुप्ता ढाका को वतन मानते हुए वहां के नारियल को कोलकाता के नारियल से बेहतर मानता है |
ढाका को आज भी अपनी जमीन मानता है, मैं कहता हमारी जमीन, हमारे पानी का मजा ही कुछ
और है | इन बातों से स्पष्ट है कि दोनों देशों के जनता के दिल में कोई भेद नहीं है |
शुभकामनाओं सहित !
नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
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