विद्यार्थियों!
आज हम आरोह पुस्तिका का सातवा अध्याय गद्य भाग -
शिरीष के फूल (लेखक: हजारी प्रसाद द्विवेदी) करेंगे |
प्रश्न 1 - शिरीष के फूल पाठक के लेखक ने गांधीजी और शिरीष के बीच तुलना क्योंकि है ?
उत्तर -
शिरीष के फूल पाठ के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने गांधी जी और शिरीष के बीच तुलना करते
हुए, उन दोनों को एक समान कठिनाइयों में जीने वाला सरस व्यक्तित्व माना है | शिरीष भयंकर लू में
भी सरस एवं फूलदार बना रहता है गांधीजी भी चारों और व्यापक अग्नि कांड एवं खून खराबे के बीच
स्नेही, अहिंसक एवं उदार बने रहे | इसी समान गुण के कारण लेखक ने दोनों के बीच तुलना की है |
प्रश्न 2 - सर्वग्राही काल की मार से बचते हुए वहीं दीर्घ जीवी हो सकता है, जिसने अपने व्यवहार
में जड़ता छोड़कर नित बदल रही स्थितियों में निरंतर अपने गतिशीलता बनाए रखी है शिरीष के
फूल पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर-
सर्वग्राही काल की मार से बचते हुए वहीं दीर्घ जीवी हो सकता है, जिस अपने व्यवहार में जड़ता
छोड़कर नित बदल रही स्थितियों में निरंतर अपनी गतिशीलता बनाए रखी है | इस पंक्ति के माध्यम
से लेखक ने यह स्पष्ट किया कि परिवर्तन संसार का नियम है | मनुष्य को समय अनुसार परिवर्तन
करते रहना चाहिए | मृत्यु तो अटल है जो लोग समय के साथ चलते हैं, नए को स्वीकार करते हुए,
अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं, उनको समाज भी अपना मानने लगता है | और वे कुछ समय के लिए
काल के कोड़ों से भी बचे रहते हैं | इसके विपरीत, जो एक ही स्थान पर जमे रहते हैं | उनको समाज
भी पुराना, निर्बल समझ कर अस्वीकार कर देता है | जरा (वृद्धावस्था) और मृत्यु अपरिचित और अति
प्रमाणित सत्य है, जिसे सभी को स्वीकार करते हुए जीवन व्यतीत करना चाहिए |
प्रश्न 3 - हाय, वह अवधूत आज कहां है? ऐसा कहकर शिरीष के फूल पाठ के माध्यम से लेखक
ने आत्मबल पर देह- बल के वर्चस्व की वर्तमान सभ्यता के संकट की ओर संकेत किया है | कैसे?
उत्तर -
हाय, “वह अवधूत आज कहां है” इस पंक्ति के माध्यम से लेखक कहता है, कि महात्मा गांधी शिरीष
के फूल की भांति थे | लेखक के अनुसार, प्रेरणादाई और आत्म विश्वास रखने वाले लोग अब रहे ही
नहीं | अब केवल शरीर को प्राथमिकता देने वाले लोग ही रह गए हैं | ऐसे लोगों में आत्मविश्वास बिल्कुल
नहीं होता | ऐसे लोग मन की सुंदरता पर ध्यान नहीं देते | लेखक ने शिरीष के फूल के माध्यम से वर्तमान
सभ्यता के भौतिकवादी दृष्टिकोण को प्रमुखता दिए जाने के बारे में बताया है |
प्रश्न 4 - “शिरीष के फूल” कविता में लेखक ने शिरीष के फूल की तुलना किन नेताओं से की है
और क्यों?
उत्तर -
“शिरीष के फूल” की विशेषता होती है, की वे नए फूल आने के पश्चात भी पेड़ से गिरने का नाम ही
नहीं लेते | तथा पेड़ पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखते हैं | वे पेड़ से तब तक नहीं झड़ते जब तक
नए-नए फूल-पत्ते मिलकर, उन्हें धक्का देकर जमीन पर ना गिरा दे | बसंत के आगमन पर भी शिरीष
के पुराने फल खड़-खड़ करते हुए पेड़ पर झूलते रहते हैं | शिरीष के फल की इसी विशेषता के कारण
लेखक ने इसकी तुलना उन नेताओं से की है, जो समय की मांग अनसुनी कर राजनीति में तब तक
जमे रहते हैं, जब नई पीढ़ी के लोग उन्हें धक्का देकर बाहर का रास्ता ना दिखा दे |
प्रश्न 5 - शिरीष के फूल आज के संदर्भ में हमें क्या संदेश देता है ? पाठ के आधार पर लिखिए?
उत्तर -
हजारी प्रसाद द्विवेदी ने शिरीष के वृक्ष का उदाहरण देकर यह सीख दी है, कि जीवन में कितना भी
संघर्ष और कोलाहल हो, मनुष्य को अपनी सरसता और अपना उत्साह बचा कर रखना चाहिए | जिस
प्रकार शिरीष चारों ओर फैली भीषण अग्नि, धूप और लू के बावजूद भी बना रहता है | उसी प्रकार
मनुष्य को चारों ओर फैले भ्रष्टाचार, अत्याचार, मारकाट, लूटपाट और खून खच्चर के बीच भी निराश
नहीं होना चाहिए | उन्हें इन विपरीत स्थितियों के बावजूद स्थिर और शांत रहना चाहिए |
प्रश्न 6 - शिरीष के फूल पाठ के लेखक शिरीष के माध्यम से कोमल एवं कठोर भावों का
समिश्रण कैसे किया गया है ?
उत्तर -
एक ही व्यक्ति कोमल और कठोर दोनों हो सकते हैं, क्योंकि कोमलता का संबंध मन की दयालुता
और सहानुभूति से होता है, अतः व्यक्ति मन से कोमल हो सकता है | दयालु और कोमल हृदय वाला
व्यक्ति भी अपने सिद्धांत और व्यवहार में कठोर हो सकता है |
पाठ के आधार पर गांधीजी अहिंसा वादी थे | सत्य, दया, धर्म, सहनशीलता, प्रेम, परोपकार, स्नेही,
सहानुभूति आदि भाव उनके कोमल व्यक्तित्व के परिचायक थे | दूसरी ओर उन्होंने किसी भी स्थिति
में अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया | उन्होंने मार-काट, अग्निकांड, लूटपाट जैसी विषम और
विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए कठोरता का परिचय दिया | अपने सिद्धांतों की रक्षा के
लिए वे स्वयं अनशन पर चले जाते और विपरीत परिस्थितियों का काफी हद तक रोकने में सफल
होते | इस प्रकार कोमल और कठोर दोनों भाग गांधीजी के व्यक्तित्व की विशेषता बन गए |
प्रश्न 7 - शिरीष की किसी एक विशेषता का उल्लेख कीजिए, जिस आचार्य हजारी प्रसाद
द्विवेदी ने उसे कालजई अवधूत कहा है ?
उत्तर -
काल के समक्ष (सामने) भी विजयी रहने वाला कालजई कहलाता है शिरीष का वृक्ष अवधूत की
भांति बसंत के आने से लेकर भाद्रपद मास तक बिना किसी परेशानी के पुष्पित होता रहता है | जब
ग्रीष्म ऋतु में सारी पृथ्वी अग्नि कुंड की तरह जलने लगती है, लू के कारण हृदय भी सूखने लगता है,
तो उस समय भी शिरीष का वृक्ष कालजई अवधूत की तरह जीवन में विजेता होने का प्रदर्शन कर रहा
होता है | वह संसार के सभी प्राणियों को धैर्यशील, चिंता रहित व कर्तव्य शील बने रहने के लिए
प्रेरित करता है | यही कारण है कि लेखक इसे सन्यासी की तरह मानता है |
शुभकामनाओं सहित !
नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
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