विद्यार्थियों
आज हम आरोह पुस्तिका का अध्याय दसवां काव्य भाग -
छोटा मेरा खेत एवं बगुलो के पंख (कवि: उमाशंकर जोशी) करेंगे |
छोटा मेरा खेत
कविता का सार
छोटा मेरा खेत कविता में उमाशंकर जोशी ने खेती के रूप के माध्यम से कवि-कर्म के प्रत्येक चरण
को बांधने का प्रयास किया है | उन्हें कागज का पन्ना, एक चकोर खेत की तरह लगता है | इस कागज
रूपी खेत में किसी भावनात्मक आंधी से बीज रूपी भाव बोया जाता है | यह बीज, रचना के भाव-विचार
को अभिव्यक्ति देने वाला है | इस बीज को कल्पना की सहायता से विकसित किया जाता है | इस
प्रक्रिया में बीज विगलित होता है | अंकुरित होता है, उसमें शब्दों के अंकुर निकलते हैं | अतः वह
पुष्पित-पल्लवित होता है अर्थात वह कृति का रूप ग्रहण करता है | उस साहित्यिक कृति से जो
अलौकिक रस- धारा प्रवाहित होती है | वह उस क्षण में होने वाली रोपाई का परिणाम है | पर यह
रस-धारा अनंत काल तक चलने वाली कटाई (साहित्य कालजई होता है और असंख्य पाठकों द्वारा
पढ़ा जाता है, उसका आनंद लिया जाता है) से कम नहीं होता | खेत में उत्पन्न होने वाला अन्य कुछ
समय के बाद समाप्त हो जाता है, किंतु साहित्य का रस कभी समाप्त नहीं होता | वह तो अक्षय बना
रहता है |
को बांधने का प्रयास किया है | उन्हें कागज का पन्ना, एक चकोर खेत की तरह लगता है | इस कागज
रूपी खेत में किसी भावनात्मक आंधी से बीज रूपी भाव बोया जाता है | यह बीज, रचना के भाव-विचार
को अभिव्यक्ति देने वाला है | इस बीज को कल्पना की सहायता से विकसित किया जाता है | इस
प्रक्रिया में बीज विगलित होता है | अंकुरित होता है, उसमें शब्दों के अंकुर निकलते हैं | अतः वह
पुष्पित-पल्लवित होता है अर्थात वह कृति का रूप ग्रहण करता है | उस साहित्यिक कृति से जो
अलौकिक रस- धारा प्रवाहित होती है | वह उस क्षण में होने वाली रोपाई का परिणाम है | पर यह
रस-धारा अनंत काल तक चलने वाली कटाई (साहित्य कालजई होता है और असंख्य पाठकों द्वारा
पढ़ा जाता है, उसका आनंद लिया जाता है) से कम नहीं होता | खेत में उत्पन्न होने वाला अन्य कुछ
समय के बाद समाप्त हो जाता है, किंतु साहित्य का रस कभी समाप्त नहीं होता | वह तो अक्षय बना
रहता है |
प्रश्न 1 - छोटे चौकोने खेत को कागज का पन्ना कहने से क्या है ?
उत्तर -
कवि को कागज का पन्ना, जिस पर रचना शब्द बुद्ध होती है | एक चौकोर खेत की तरह लगती है |
कवि-ह्रदय मैं जब भावनात्मक आवेग आता है, तो कागज पर रचना का मूल भाव अर्थात बीज पड़ता
है | तो बाद में शब्द बद्ध होकर रचना का रूप धारण करता है |
प्रश्न 2 - रस का अक्षय पात्र से कवि ने रचना कर्म की किन विशेषताओं की ओर इंगित किया है ?
उत्तर -
रस का अक्षय पात्र का अर्थ है, रस यानी आनंद का कभी समाप्त न होने वाला पात्र | इसमें रचना-कर्म
की निम्नलिखित विशेषताओं की ओर इंगित किया गया है |
1)... रचना -कर्म द्वारा रचनाकार जिसे साहित्यिक कृति की रचना करता है, उसमें अलौकिक रस-धार
निकलती है |
2)... साहित्यिक कृति कालजई होती है इसका रस सदैव बना रहता है |
3)... असंख्य पाठकों द्वारा असंख्य बार पढ़े जाने पर भी उसका आनंद रूपी रस कम नहीं होता |
4)... कृषि- कर्म से उत्पन्न उत्पन्न अन्न का रस कुछ समय बाद समाप्त हो जाता है | किंतु रचना-कर्म
द्वारा रचित कालजई कृति का आनंद सदैव बना रहता है |
प्रश्न 3 - रचना के संदर्भ में अंधड़ और बीज क्या है ?
उत्तर -
रचना के संदर्भ में अंधड़ भावनात्मक आवेग है जिसके द्वारा कभी अपने मन के भावों, विचारों और
संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का आधार बनाता है| “बीज” रचना के संदर्भ में, रचना का मूल भाव है |
जो कल्पना का सहारा पाकर विकसित होता है, और अंततः एक संपूर्ण कृति का स्वरूप ग्रहण करता है |
यह बीज रूपी भाव रचना के रूप में अभिव्यक्त होता है |
बगुलो के पंख
कविता का सार
बगुलो के पंखकविता में कवि उमाशंकर जोशी प्राकृतिक सौंदर्य के प्रभाव को उत्पन्न करने के लिए
अनेक युक्तियों का प्रयोग करते हैं | कवि आकाश में पंक्ति बनाकर उड़ते हुए सफेद बगुलो की पंक्ति
देखता है उस पर इस दृश्य का ऐसा प्रभाव पड़ता है कि वह उन उड़ते हुए बबलू को देखता ही रह जाता
है | उसे लगता है कि यह पंक्ति उसकी आंखें ही चुरा कर अपने साथ लिए जा रही है |काले बादलों से
आच्छादित अकाश में संध्या के समय तेज भरपूर सफेद शरीर तर रहे हैं | अर्थात काले बादलों से गिरे
आकाश में सफेद बगुलो के शरीर तैरते हुए प्रतीत होते हैं | यह दृश्य इतना आकर्षण लगता है कि कभी
सब कुछ भूल कर उसी में अटका रह जाता है | वह इस माया अर्थात इस आकर्षण में स्वयं को बचाने
की गुहार लगाता है |
अनेक युक्तियों का प्रयोग करते हैं | कवि आकाश में पंक्ति बनाकर उड़ते हुए सफेद बगुलो की पंक्ति
देखता है उस पर इस दृश्य का ऐसा प्रभाव पड़ता है कि वह उन उड़ते हुए बबलू को देखता ही रह जाता
है | उसे लगता है कि यह पंक्ति उसकी आंखें ही चुरा कर अपने साथ लिए जा रही है |काले बादलों से
आच्छादित अकाश में संध्या के समय तेज भरपूर सफेद शरीर तर रहे हैं | अर्थात काले बादलों से गिरे
आकाश में सफेद बगुलो के शरीर तैरते हुए प्रतीत होते हैं | यह दृश्य इतना आकर्षण लगता है कि कभी
सब कुछ भूल कर उसी में अटका रह जाता है | वह इस माया अर्थात इस आकर्षण में स्वयं को बचाने
की गुहार लगाता है |
प्रश्न 1 - कवि किसे रोककर रखना चाहता है और क्यों ?
उत्तर -
कवि साज के समय कजरारे बादलों से भरे आकाश में उड़ते बगुलो की पंक्तियां के सौंदर्य को रोककर
रखना चाहता है | उस दृश्य को देखने से उसका मन नहीं भरा वह चाहता है कि वह उस दृश्य को और
अधिक समय तक देखता रहे इसलिए वह उसे रोककर रखना चाहता है |
शुभकामनाओं सहित !
नीलम
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
35-मॉडल, चंडीगढ़ |
No comments:
Post a Comment